Delhi University में Protest बैन को लेकर Delhi High Court की सख्त टिप्पड़ी
Sandesh Wahak Digital Desk: दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने गुरुवार को दिल्ली यूनिवर्सिटी और दिल्ली पुलिस के उस आदेश पर सवाल उठाए, जिसमें यूनिवर्सिटी में विरोध प्रदर्शन पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया था। कोर्ट ने साफ कहा कि प्रोटेस्ट, प्रदर्शन और जुलूस पर पूरी तरह बैन नहीं लगाया जा सकता। अगर कानून-व्यवस्था का उल्लंघन होता है तो पुलिस को कार्रवाई करनी चाहिए, लेकिन सभी तरह के विरोध प्रदर्शनों पर पूरी तरह रोक लगाना सही नहीं है।
कोर्ट ने उठाए कई अहम सवाल
चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की डिवीजन बेंच ने कहा कि आदेश में पब्लिक मीटिंग, रैली, जुलूस, प्रदर्शन, विरोध, धरना या किसी भी तरह के आंदोलन पर रोक की बात कही गई है। ऐसे में शांतिपूर्ण प्रोटेस्ट भी इसके दायरे में आ जाएंगे। कोर्ट ने पूछा कि इस तरह का आदेश जारी करने की जरूरत क्यों पड़ी और इसे किस आधार पर सही ठहराया जा सकता है।
कोर्ट (Delhi High Court) ने यह भी कहा कि अगर किसी ने धारा 144 का उल्लंघन किया था तो पुलिस को उसके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए थी। इसके साथ ही कोर्ट ने विरोध प्रदर्शन रोकने के लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 144 के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए।
कोर्ट ने DU और पुलिस से मांगा जवाब
हालांकि कोर्ट (Delhi High Court) ने दिल्ली यूनिवर्सिटी और पुलिस के आदेश पर फिलहाल कोई अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया। इसके बजाय कोर्ट ने दिल्ली यूनिवर्सिटी और दिल्ली पुलिस को एक सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके बाद ही मामले में आगे फैसला लिया जाएगा।
छात्रों के व्यवहार पर भी कोर्ट की टिप्पणी
दरअसल सुनवाई के दौरान कोर्ट (Delhi High Court) ने छात्रों के व्यवहार पर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि वह इस मामले पर केवल इसलिए विचार कर रहा है क्योंकि यह संविधान के आर्टिकल 19 से जुड़ा मामला है, जो बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से संबंधित है। कोर्ट ने कहा कि इस आजादी का गलत इस्तेमाल नहीं किया जा सकता और छात्रों को जिम्मेदारी से व्यवहार करना चाहिए।
कोर्ट ने यह भी कहा कि दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन के चुनाव के दौरान जो हालात बने थे, उन्हें भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कोर्ट के मुताबिक कोई भी एकेडमिक व्यक्ति ऐसा आदेश देना नहीं चाहता, लेकिन हालात ऐसे बन जाते हैं कि सख्त फैसले लेने पड़ते हैं।
25 मार्च को होगी अगली सुनवाई
बेंच ने मामले की अगली सुनवाई 25 मार्च को तय की है। दरअसल यह मामला दिल्ली यूनिवर्सिटी के लॉ फैकल्टी के छात्र उदय भदौरिया की याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया है।
याचिका में उठाए गए संवैधानिक सवाल
याचिकाकर्ता उदय भदौरिया ने प्रॉक्टर ऑफिस के 17 फरवरी के उस नोटिफिकेशन को चुनौती दी है, जिसमें यूनिवर्सिटी कैंपस और उससे जुड़े कॉलेजों में पब्लिक मीटिंग, जुलूस, प्रदर्शन और पांच या उससे अधिक लोगों के शांतिपूर्ण जमावड़े पर रोक लगाई गई थी। यह फैसला यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन की इक्विटी गाइडलाइंस को लेकर हुए छात्र प्रदर्शनों के दौरान हुई झड़पों के बाद लिया गया था।
कॉलेजों और पुलिस की सख्ती
इसके बाद किरोड़ीमल कॉलेज और दयाल सिंह कॉलेज की ओर से जारी एडवाइजरी में इस रोक को और सख्ती से लागू करने की बात कही गई। इसमें नियमों के उल्लंघन पर सस्पेंशन और नौकरी से निकालने जैसी अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई। साथ ही स्टूडेंट्स और स्टाफ को सोशल मीडिया पर इससे जुड़े कंटेंट को साझा करने से भी सावधान किया गया।
इसी बीच दिल्ली पुलिस ने भी विरोध प्रदर्शनों के खिलाफ आदेश जारी करते हुए रोक को अप्रैल तक बढ़ाने की जानकारी दी। याचिकाकर्ता का कहना है कि इस तरह की पूरी तरह से रोक संविधान के आर्टिकल 14 और 19 का उल्लंघन है और यह एकेडमिक चर्चा और संवाद के माहौल को प्रभावित करती है।
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