रिश्वत के आरोपों में सस्पेंड चल रहे आईएएस अभिषेक प्रकाश हुए बहाल, राज्यपाल ने जारी किया आदेश
Lucknow News: उत्तर प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी अभिषेक प्रकाश के लिए राहत भरी खबर आई है। राज्यपाल की मंजूरी के बाद उन्हें 15 मार्च, 2026 से सेवा में बहाल करने का आदेश जारी कर दिया गया है। हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा उनके खिलाफ दाखिल चार्जशीट को रद्द किए जाने के बाद शासन ने यह कदम उठाया है। हालांकि, बहाली के बावजूद उनके खिलाफ चल रही विभागीय जांच जारी रहेगी।
अभिषेक प्रकाश को 20 मार्च, 2025 को निलंबित किया गया था। उन पर एक सोलर कंपनी से प्रोजेक्ट पास कराने के बदले रिश्वत मांगने का गंभीर आरोप लगा था। कंपनी की शिकायत पर सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उन्हें सस्पेंड कर दिया था।
हाईकोर्ट का फैसला और बहाली का आधार
मामले की सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने पाया कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत (साक्ष्य) मौजूद नहीं हैं।
चार्जशीट रद्द: सबूतों के अभाव में अदालत ने दो दिन पहले उनके खिलाफ दाखिल चार्जशीट को खारिज कर दिया।
तकनीकी पहलू: नियमों के मुताबिक, निलंबन की अवधि एक वर्ष पूरी होने से पहले केंद्र को रिपोर्ट भेजनी होती है। कोर्ट के फैसले के बाद शासन ने उनकी बहाली की प्रक्रिया 14 मार्च तक पूरी कर ली।
भटगांव और डिफेंस कॉरिडोर भूमि घोटाला
अभिषेक प्रकाश की मुश्किलें केवल एक मामले तक सीमित नहीं रही हैं। उनके खिलाफ भटगांव जमीन अधिग्रहण और डिफेंस कॉरिडोर भूमि घोटाले में भी जांच चल रही है। राजस्व विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, लखनऊ के जिलाधिकारी रहते हुए उन्होंने डिफेंस कॉरिडोर के लिए फर्जी पट्टों के आधार पर मुआवजा बांटने की अनुमति दी थी।
अधिकारों का उल्लंघन: आरोप है कि नियमविरुद्ध तरीके से जमीन के अधिकार बदले गए और अनुसूचित जाति की भूमि गैर-अनुसूचित जाति के लोगों को बेचने की अनुमति तथ्यों को छिपाकर दी गई।
विभागीय जांच: बहाली के आदेश में स्पष्ट किया गया है कि इन मामलों में विभागीय स्तर पर साक्ष्य जुटाने और जांच की प्रक्रिया चलती रहेगी।
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