कानपुर में गैस और कच्चे माल की किल्लत से 250 फैक्ट्रियां बंद, हजारों मजदूरों की नौकरी पर खतरा
Kanpur News: कानपुर के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र दादानगर, फजलगंज, पनकी और रनिया इन दिनों एक अभूतपूर्व संकट से गुजर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में उछाल और गैस आपूर्ति बाधित होने से मेटल कटिंग, प्लास्टिक और डिटर्जेंट उद्योग लगभग ठप होने की कगार पर हैं।
मेटल कटिंग उद्योग: 2000 मजदूरों के सामने चूल्हा जलाने की चुनौती
लोहा, स्टील और एल्युमिनियम कटिंग का काम पूरी तरह कॉमर्शियल एलपीजी गैस पर निर्भर है। पिछले चार दिनों से गैस सिलेंडरों की किल्लत के चलते 500 से अधिक कटिंग इकाइयां बंद पड़ी हैं।
सालाना कारोबार: 1500 करोड़ रुपये।
असर: ऑटोमोबाइल और कृषि उपकरण बनाने वाली कंपनियां प्रभावित हो रही हैं। फीटा के महासचिव उमंग अग्रवाल का कहना है कि मशीनों के पहिए थमने से करीब दो हजार मजदूर खाली बैठ गए हैं।
प्लास्टिक उद्योग: 40% छंटनी की तैयारी
कच्चे तेल की कमी से प्लास्टिक दाने की कीमतें आसमान छू रही हैं। लागत बढ़ने और नए ऑर्डर न मिलने से फैक्ट्रियों में उत्पादन 70 प्रतिशत तक गिर गया है।
छंटनी का डर: कानपुर प्लास्टिक एसोसिएशन के अध्यक्ष इखलाक मिर्जा ने चेतावनी दी है कि अगर हालात एक-दो दिन में नहीं सुधरे, तो उद्योगों को 40 फीसदी तक कर्मचारियों की छंटनी करनी पड़ेगी।
निर्यात को झटका: हर साल होने वाला 650 करोड़ रुपये का निर्यात कारोबार भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में पिछड़ रहा है।
साबुन-डिटर्जेंट उद्योग: 5000 श्रमिक घर बैठने को मजबूर
कानपुर का पारंपरिक साबुन और डिटर्जेंट उद्योग कच्चे माल की सप्लाई रुकने से सबसे ज्यादा प्रभावित है। डिटर्जेंट बनाने में इस्तेमाल होने वाला केमिकल ‘लैब्सा’ (LABSA) दो महीने में 120 रुपये से बढ़कर 260 रुपये किलो तक पहुँच गया है।
यूनिट्स बंद: रनिया और भौंती जैसे इलाकों की करीब 250 फैक्ट्रियां बंद हो चुकी हैं।
कारोबारियों का दर्द: वरिष्ठ कारोबारी भगवान दास शिवानी और मिकी मनचंदा के अनुसार, बड़ी कंपनियों ने एमएसएमई सेक्टर को माल देने से हाथ खड़े कर दिए हैं, जिससे 5000 करोड़ का यह कारोबार संकट में है।
फैक्ट्रियों के गेट पर ताले लटके देख श्रमिकों की आंखों में भविष्य को लेकर डर साफ नजर आ रहा है। रोज कमाने-खाने वाले पांच हजार से अधिक मजदूर घर बैठने को मजबूर हैं। कारोबारियों ने सरकार से गुहार लगाई है कि हस्तक्षेप कर कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित कराई जाए, वरना दशकों पुराना यह उद्योग पूरी तरह तबाह हो जाएगा।

