अब बच्चा गोद लेने वाली महिलाओं को भी मिलेगी Maternity Leave, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
Sandesh Wahak Digital Desk: Supreme Court of India ने मैटरनिटी लीव (Maternity Leave) को लेकर एक अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि अगर कोई महिला 3 महीने या उससे ज्यादा उम्र के बच्चे को गोद लेती है, तो उसे भी मैटरनिटी लीव का पूरा अधिकार मिलेगा। यह फैसला Adoptive Mothers के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है और Child Adoption से जुड़े अधिकारों को मजबूती देता है।
पुराने नियमों में बदलाव
इस फैसले से पहले नियम यह था कि 3 महीने से अधिक उम्र के बच्चे को गोद लेने पर महिला को मैटरनिटी लीव (Maternity Leave) की सुविधा नहीं मिलती थी और केवल 12 हफ्तों की छुट्टी दी जाती थी। अब कोर्ट ने साफ कर दिया है कि ऐसी महिलाओं को इस अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता है। यह फैसला Gender Equality और Workplace Rights के नजरिए से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि गोद लिया गया बच्चा जैविक बच्चे से अलग नहीं होता है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि Maternity Leave एक अहम Human Rights का हिस्सा है और मातृत्व संरक्षण हर हकदार को मिलना चाहिए। यह निर्णय महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
Adoptive Mothers के लिए राहत
इस फैसले के बाद गोद लेने वाली महिलाओं को बच्चे की देखभाल के लिए पूरा समय और अधिकार मिल सकेगा। अब यह बाध्यता नहीं रहेगी कि बच्चा केवल 3 महीने से कम उम्र का ही हो। इससे Adoptive Mothers को समान अधिकार मिलने का रास्ता साफ हो गया है और Child Care को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
हालांकि कोर्ट ने मैटरनिटी लीव (Maternity Leave) पर स्पष्ट निर्णय दे दिया है, लेकिन Paternity Leave को लेकर फैसला सरकार पर छोड़ दिया है। कोर्ट ने कहा है कि पितृत्व अवकाश के नियमों और संभावित बदलावों पर अंतिम निर्णय सरकार ही करेगी।
Also Read: Bollywood News: ‘सरके चुनर तेरी’ गाने पर विवाद, Nora Fatehi के डांस वीडियो को लेकर उठी बैन की मांग

