UP के नए DGP के चयन की प्रक्रिया तेज, योगी सरकार ने UPSC को भेजा 36 से ज्यादा IPS अफसरों का पैनल
Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश के गृह विभाग ने राज्य के नए और स्थायी पुलिस महानिदेशक की नियुक्ति के लिए औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं। पिछले कई सालों से ‘कार्यवाहक’ डीजीपी के भरोसे चल रहे यूपी पुलिस विभाग को अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत एक स्थायी मुखिया मिलेगा। इसके लिए सरकार ने 30 साल की सेवा पूरी कर चुके तीन दर्जन से अधिक (36+) वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नाम आयोग को भेजे हैं।
वरिष्ठता और चयन का गणित
नियमों के मुताबिक, राज्य सरकार ने वर्ष 1990 से 1996 बैच के अधिकारियों की सूची भेजी है। अब UPSC इनमें से वरिष्ठता, सेवा रिकॉर्ड और अनुभव के आधार पर तीन सबसे उपयुक्त अधिकारियों के नाम शॉर्टलिस्ट करके राज्य सरकार को वापस भेजेगा। अंत में, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इन तीन नामों में से किसी एक को यूपी का नया डीजीपी नियुक्त करेंगे।
कौन हैं रेस में सबसे आगे?
वर्तमान वरिष्ठता सूची (Seniority List) के अनुसार कुछ बड़े नाम चर्चा में हैं।
रेणुका मिश्रा (1990 बैच): ये वर्तमान में सबसे वरिष्ठ अधिकारी हैं, हालांकि चर्चा है कि उन्होंने वीआरएस (VRS) के लिए आवेदन किया है।
आलोक शर्मा (1991 बैच): वर्तमान में केंद्र में डीजी एसपीजी (SPG) के पद पर तैनात हैं।
पीयूष आनंद (1991 बैच): वर्तमान में डीजी एनडीआरएफ (NDRF) के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
राजीव कृष्ण (1991 बैच): वर्तमान में उत्तर प्रदेश के कार्यवाहक डीजीपी हैं।
राजीव कृष्ण के नाम पर मुहर लगने की संभावना
जानकारों का मानना है कि वर्तमान कार्यवाहक डीजीपी राजीव कृष्ण का नाम इस रेस में सबसे आगे है। वे मुख्यमंत्री के भरोसेमंद अधिकारियों में गिने जाते हैं और वर्तमान में पद पर बने रहने के कारण उनकी कार्यप्रणाली से सरकार संतुष्ट है। माना जा रहा है कि आयोग से पैनल वापस आने के बाद सरकार उनके नाम पर स्थायी मुहर लगा सकती है।
क्यों जरूरी है पूर्णकालिक DGP?
सुप्रीम कोर्ट ने हाल के आदेशों में स्पष्ट किया है कि राज्यों को ‘कार्यवाहक’ डीजीपी की परंपरा को खत्म कर स्थायी नियुक्ति करनी चाहिए, ताकि पुलिस बल में स्थिरता और पारदर्शिता बनी रहे। चयनित अधिकारी को कम से कम 2 साल का फिक्स्ड कार्यकाल मिलता है।
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