निजी परिसर में प्रार्थना पर रोक नहीं, संभल मामले में Allahabad High Court की सख्त टिप्पणी
Prayagraj News: इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने अपने आदेश में एक बार फिर स्पष्ट किया है कि किसी भी व्यक्ति के निजी परिसर में प्रार्थना या धार्मिक आयोजन पर रोक नहीं लगाई जा सकती, चाहे वह किसी भी धर्म में आस्था रखता हो। कोर्ट ने यह भी कहा कि संभल में जिस स्थान को मस्जिद बताया जा रहा है, वह वर्तमान में मस्जिद नहीं है, हालांकि वहां नमाज अदा करने पर कोई रोक नहीं होगी।
प्रशासन पर जताई नाराजगी
गौरतलब हो कि कोर्ट ने इस मामले में संभल के पुलिस अधीक्षक और जिलाधिकारी पर नाराजगी जताई थी। हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि यदि अधिकारी जिले में कानून का शासन स्थापित नहीं कर सकते हैं तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए या अपना तबादला करवा लेना चाहिए। यह टिप्पणी उस समय आई जब प्रशासन ने कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए एक परिसर में नमाजियों की संख्या सीमित कर दी थी।
ढांचे को मस्जिद मानने से इनकार
जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान संबंधित ढांचे की तस्वीरें देखीं और कहा कि यह ढांचा आज की तारीख में मस्जिद नहीं है। हालांकि कोर्ट ने यह भी माना कि इस स्थान का उपयोग पहले नमाज अदा करने के उद्देश्य से किया जाता रहा है, इसलिए वहां नमाज पढ़ने पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता।
परंपरा के पालन के निर्देश
दो जजों की बेंच ने 16 मार्च को संभल निवासी मुनाजिर खान की याचिका का निस्तारण करते हुए प्रशासन को निर्देश दिया कि 1995 से चली आ रही परंपरा का पालन सुनिश्चित किया जाए। कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी दोहराया कि जिस स्थान को मस्जिद कहा जा रहा है, उसे मस्जिद नहीं माना जा सकता, लेकिन धार्मिक गतिविधियां जारी रह सकती हैं।
दावे और कोर्ट की टिप्पणी
दरअसल मुनाजिर खान ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि जिला प्रशासन ने रमजान के दौरान उनके परिसर में केवल 20 लोगों को नमाज अदा करने की अनुमति दी, जबकि वहां अधिक लोग एकत्र हो सकते थे। उन्होंने बताया कि उनके बाबा ने 1995 में यह ढांचा बनवाया था और वक्फ भी किया गया था, जहां नियमित रूप से नमाज पढ़ी जाती है। हालांकि कोर्ट (Allahabad High Court) ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता ने पूरी तरह सही जानकारी प्रस्तुत नहीं की। तस्वीरों के आधार पर कोर्ट ने माना कि यह एक दो मंजिला घर है, जिसमें अन्य कमरे भी हैं जहां नमाज पढ़ी जाती है, लेकिन इसे मस्जिद नहीं कहा जा सकता।
सरकार का पक्ष
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने भी अपना पक्ष रखते हुए कहा कि सरकार किसी की निजी संपत्ति या पूजा स्थल पर पूजा या नमाज को लेकर हस्तक्षेप नहीं करती है। यदि कोई बाधा उत्पन्न करता है तो प्रशासन सुरक्षा उपलब्ध कराता है।
Allahabad High Court की अहम टिप्पणी
दरअसल हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने इस मामले की सुनवाई के दौरान देश की विविधता पर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि 1.4 अरब की आबादी वाले इस देश की खूबसूरती इसके लचीलेपन और ताकत में निहित है, जो इसकी ऐतिहासिक, धार्मिक, सांस्कृतिक और भाषाई विविधता से उत्पन्न होती है। यह भी कहा गया कि दुनिया में शायद ही कोई दूसरा देश होगा जहां सदियों से इतनी विविधताएं एक साथ सह-अस्तित्व में रही हों।
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