भारत को तैयार करना होगा ड्रोन निर्माण के क्षेत्र में मजबूत इकोसिस्टम: Rajnath Singh

Sandesh Wahak Digital Desk: वैश्विक स्तर पर चुनौतियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग के बाद अब ईरान और इजराइल के बीच संघर्ष ने युद्ध के बदलते स्वरूप को सामने रखा है। इन हालातों के बीच ड्रोन तकनीक की अहमियत तेजी से बढ़ी है। इसी संदर्भ में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने कहा है कि भारत को ड्रोन निर्माण के क्षेत्र में मजबूत इकोसिस्टम तैयार करना होगा और आने वाले वर्षों में इसे वैश्विक केंद्र बनना चाहिए।

राष्ट्रीय रक्षा उद्योग सम्मेलन में दिया बयान

दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय रक्षा उद्योग सम्मेलन 2026 को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने कहा कि रूस-यूक्रेन और ईरान-इजराइल के संघर्षों ने ड्रोन और काउंटर-ड्रोन तकनीकों के महत्व को स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने कहा कि भविष्य के युद्धों में इन तकनीकों की भूमिका बेहद अहम होने वाली है और भारत को इस दिशा में तेजी से काम करना होगा।

ड्रोन निर्माण के लिए इकोसिस्टम जरूरी

रक्षा मंत्री ने कहा कि रणनीतिक स्वायत्तता, रक्षा तत्परता और आत्मनिर्भरता के लिए स्वदेशी ड्रोन उत्पादन के लिए एक मजबूत इकोसिस्टम तैयार करना जरूरी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को ऐसा तंत्र विकसित करना होगा जिसमें ड्रोन निर्माण पूरी तरह से देश के भीतर ही संभव हो सके।

राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने ड्रोन के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और अन्य उभरती तकनीकों के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ऑटोमेशन, एआई और रोबोटिक्स जैसे इनोवेशन पूरी दुनिया में विनिर्माण क्षेत्र को बदल रहे हैं और सिमुलेशन तकनीक भी नए अवसर पैदा कर रही है।

उद्योग जगत से गुणवत्ता सुधारने की अपील

रक्षा मंत्री ने उद्योग जगत से जुड़े प्रमुख कंपनियों से अपने उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार लाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता केवल अंतिम उत्पाद तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसके सभी पुर्जों जैसे सॉफ्टवेयर, इंजन और बैटरी तक देश में ही तैयार किए जाने चाहिए।

राजनाथ सिंह ने यह भी स्वीकार किया कि ड्रोन निर्माण में पूर्ण आत्मनिर्भरता हासिल करना आसान नहीं है, क्योंकि कई देशों में भी इसके महत्वपूर्ण पुर्जे अन्य देशों से आयात किए जाते हैं। इसके बावजूद उन्होंने इस दिशा में निरंतर प्रयास करने की जरूरत पर बल दिया।

आर्थिक विकास में स्टार्टअप्स की भूमिका

उन्होंने (Rajnath Singh) कहा कि देश के आर्थिक विकास में एमएसएमई की महत्वपूर्ण भूमिका है और विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए नई तकनीकों को अपनाना आवश्यक है। इसी दौरान रक्षा मंत्री ने iDEX फ्रेमवर्क के तहत डिफेंस इंडिया स्टार्ट-अप चैलेंज के 14वें एडिशन और ADITI चैलेंज के चौथे एडिशन को लॉन्च किया, जिसमें रक्षा बलों, भारतीय तटरक्षक बल और रक्षा अंतरिक्ष एजेंसी से जुड़ी कुल 107 समस्याएं शामिल की गईं, ताकि इनोवेशन को बढ़ावा दिया जा सके।

 

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