Strait Of Hormuz की जगह अब इस रुट से भारत आएगा तेल, ऑयल स्ट्रेटजी में आया बड़ा बदलाव
Sandesh Wahak Digital Desk: ईरान और ओमान के बीच स्थित संकरे समुद्री गलियारे होर्मुज स्ट्रेट (Strait Of Hormuz) से तेल की सप्लाई लगभग बाधित हो चुकी है। मिसाइलों और ड्रोन हमलों के बीच इस रूट से आने वाला तेल अब भारतीय नौसेना की निगरानी में भारत पहुंच रहा है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए भारत ने अपनी ऑयल स्ट्रेटजी में बड़ा बदलाव किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी लोकसभा में इस बदलाव की जानकारी दी और बताया कि भारत अब पहले के 27 देशों की जगह 41 देशों से कच्चा तेल आयात कर रहा है।
री-रूटिंग के जरिए आपूर्ति सुरक्षित करने की कोशिश
दरअसल हाई रिस्क बन चुके होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही महंगी और खतरनाक हो गई है। युद्ध से पहले भारत का करीब 88 फीसदी तेल और 55 फीसदी गैस इसी रास्ते से आती थी। अब नई दिल्ली इस पुराने लॉजिस्टिक सिस्टम में तेजी से बदलाव कर रही है और तेल टैंकरों के लिए वैकल्पिक रूट तैयार किए जा रहे हैं। सरकार का फोकस अब सुरक्षित और कम जोखिम वाले समुद्री मार्गों पर है।
भारत ने होर्मुज स्ट्रेट को छोड़कर अन्य रूट्स से तेल आयात को तेजी से बढ़ाया है। जहां पहले यह आंकड़ा करीब 55 फीसदी था, वहीं अब यह बढ़कर लगभग 75 फीसदी हो गया है। युद्ध से पहले भारत प्रतिदिन 25 से 27 लाख बैरल कच्चा तेल इसी रूट से मंगाता था, जो मुख्य रूप से इराक, सऊदी अरब, यूएई और कुवैत से आता था। भारत अपनी 80 से 85 फीसदी एलपीजी जरूरतों के लिए भी आयात पर निर्भर है और चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा आयातक है।
लंबे लेकिन सुरक्षित वैकल्पिक रूट बने विकल्प
रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत अब रूस, अटलांटिक बेसिन, अमेरिका, पश्चिमी अफ्रीका और लैटिन अमेरिकी देशों से तेल आयात बढ़ा सकता है। हालांकि इन रूट्स से तेल आने में 25 से 45 दिन तक लग सकते हैं, जबकि खाड़ी देशों से यह समय 5 से 7 दिन का होता है। इससे सप्लाई चेन में देरी के साथ लागत भी बढ़ जाती है, लेकिन जोखिम कम हो जाता है।
भारतीय नौसेना भारतीय नौसेना ऑपरेशन संकल्प के तहत तेल टैंकरों की सुरक्षा में जुटी हुई है। युद्धपोत पूरे रास्ते इन टैंकरों को सुरक्षित भारत तक पहुंचा रहे हैं। 18 मार्च को एक ऑयल टैंकर “जाग लाडकी” नौसेना की सुरक्षा में मुंद्रा पोर्ट पहुंचा था, जो इस ऑपरेशन की सक्रियता को दिखाता है।
पश्चिम एशिया के मौजूदा युद्ध ने भारत के सामने भी अप्रत्याशित चुनौतियां खड़ी की हैं। इसलिए यह आवश्यक है कि देश की संसद से इस संकट को लेकर एकमत और एकजुट आवाज दुनियाभर में जाए। pic.twitter.com/VUD5LIDuSw
— Narendra Modi (@narendramodi) March 23, 2026
पाइपलाइन भी बन रही वैकल्पिक व्यवस्था
संयुक्त अरब अमीरात की हबशाह-फूजिराह पाइपलाइन और सऊदी अरब की पेट्रोलाइन होर्मुज को बायपास कर तेल को ओमान की खाड़ी और लाल सागर तक पहुंचा रही हैं। हालांकि इन पाइपलाइनों की क्षमता सीमित है और ये 20 मिलियन बैरल की जगह केवल 2.6 मिलियन बैरल प्रतिदिन तेल सप्लाई कर सकती हैं। इराक, कुवैत और कतर जैसे देशों के पास फिलहाल पाइपलाइन विकल्प भी नहीं है।
पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा के अनुसार, भारत ने अपने आयात के स्रोतों का विस्तार किया है और अब करीब 70 फीसदी तेल ऐसे देशों से आ रहा है, जो होर्मुज स्ट्रेट से नहीं गुजरते हैं। पहले यह आंकड़ा करीब 55 फीसदी था, जिससे भारत की निर्भरता में बड़ा बदलाव आया है।
अमेरिका, रूस और अफ्रीकी देशों से बढ़ेगी सप्लाई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में बताया कि भारत ने पिछले 11 वर्षों में अपने कच्चे तेल के आयात को काफी विविध बनाया है। देश अब 41 देशों से ऊर्जा आयात कर रहा है। साथ ही भारत अपने रणनीतिक भंडार को भी मजबूत कर रहा है और इस समय उसके पास करीब 53 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल का रिजर्व मौजूद है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, रूस के अलावा अमेरिका और लैटिन अमेरिकी देशों से तेल आयात बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। नाइजीरिया और अंगोला जैसे पश्चिमी अफ्रीकी देश भी भारत के लिए विकल्प बन सकते हैं। हालांकि इन रूट्स से तेल मंगाने में समय और लागत अधिक लगती है, लेकिन इससे कीमतों को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
ईरान से मिल रहा सुरक्षित रास्ता
भारत ने तेल आपूर्ति को लेकर ईरान के साथ लगातार संवाद बनाए रखा है। कूटनीतिक स्तर पर भारत को राहत मिली है कि होर्मुज स्ट्रेट के आसपास फंसे भारतीय जहाजों को ईरान सुरक्षित रास्ता दे रहा है। यह कदम मित्र देशों के लिए उठाया गया है और इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा को आंशिक राहत मिली है।
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