लखनऊ में अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन ठगी नेटवर्क का भंडाफोड़, गिरोह के 9 सदस्य गिरफ्तार
Lucknow News: लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट की उत्तरी जोन पुलिस को साइबर अपराधियों के खिलाफ चल रहे राज्यव्यापी अभियान ऑपरेशन साइबर वज्र के तहत एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। मड़ियांव थाना पुलिस, सर्विलांस/क्राइम टीम और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने मिलकर एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी रैकेट का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस संगठित गिरोह के नौ शातिर सदस्यों को गिरफ्तार किया है। यह पूरी कार्रवाई पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्णा के दिशा-निर्देशन और पुलिस उपायुक्त (उत्तरी) के नेतृत्व में की गई है, जिसका उद्देश्य ऑनलाइन वित्तीय अपराधों और म्यूल अकाउंट्स पर पूरी तरह से नकेल कसना है।
म्यूल अकाउंट्स के वेरिफिकेशन से खुला राज
पुलिस को यह कामयाबी NCRP/JMIS पोर्टल से मिले म्यूल अकाउंट्स (संदिग्ध बैंक खातों) के सत्यापन के दौरान मिली। जांच में कई बैंक खाते और उनसे जुड़े संदिग्ध लोग पुलिस के राडार पर आए, जिसके बाद संयुक्त टीम ने घेराबंदी करके गिरोह के नौ सदस्यों को धर दबोचा। पकड़े गए आरोपियों में मोहम्मद शाहरुख, महफूज खान, मोहम्मद बसर, मोहम्मद रुबान, साबिर, सिकंदर और फरहान तुफैल समेत कुल नौ लोग शामिल हैं।
पूछताछ में आरोपियों ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। यह गिरोह सीधे-साधे और भोले-भाले लोगों को बहला-फुसलाकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाता था। इसके बाद इन खातों का इस्तेमाल ‘म्यूल अकाउंट’ के रूप में किया जाता था, जहां साइबर ठगी की अवैध रकम जमा होती थी। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस पैसे को तुरंत डिजिटल करेंसी यानी USDT (क्रिप्टोकरेंसी) में बदल दिया जाता था और फिर विदेशों में बैठे अंतरराष्ट्रीय मास्टरमाइंड्स तक ट्रांसफर कर दिया जाता था। इस पूरी प्रक्रिया के बदले स्थानीय गिरोह को हर ट्रांजैक्शन पर मोटा कमीशन मिलता था।
पुलिस ने गिरफ्तार किए गए अपराधियों के पास से अवैध गतिविधियों में इस्तेमाल होने वाला भारी सामान बरामद किया है। इनके कब्जे से विभिन्न बैंकों के 50 एटीएम कार्ड, तीन चेकबुक, दो पासबुक, तीन मोबाइल फोन, एक टैबलेट और 53,100 रुपये की नकदी बरामद हुई है। इसके साथ ही पुलिस को कई ऐसे डिजिटल सबूत भी मिले हैं, जो इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में मददगार साबित होंगे।
फरार मास्टरमाइंड की तलाश जारी
पकड़े गए सभी आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आईटी (IT) एक्ट की गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बरामद दस्तावेजों और गैजेट्स के आधार पर गिरोह से जुड़े अन्य बैंक खातों और मददगारों की जांच की जा रही है। गिरोह के मुख्य मास्टरमाइंड और अन्य फरार साथियों को पकड़ने के लिए दबिश दी जा रही है। ऑपरेशन साइबर वज्र के तहत फर्जी खातों और ऑनलाइन लुटेरों के खिलाफ यह सख्त अभियान आगे भी जारी रहेगा।
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