वेस्ट एशिया तनाव के बीच भारत में हीलियम गैस की सप्लाई पर संकट, सरकार सक्रिय

Sandesh Wahak Digital Desk: वेस्ट एशिया में जारी युद्ध के चलते देश में हीलियम गैस (Helium Gas) की सप्लाई प्रभावित हो गई है। इसका सीधा असर सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री, ऑप्टिकल फाइबर और स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनियों पर पड़ रहा है, जिन्हें गैस की कमी से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में रुकावट से सप्लाई ठप

सूत्रों के मुताबिक, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में आई रुकावटों के कारण हीलियम की आपूर्ति बाधित हो गई है। स्थिति को संभालने के लिए पेट्रोलियम मंत्रालय ने अमेरिका और अल्जीरिया से संपर्क किया है, ताकि सप्लाई बहाल की जा सके।

कतर का बड़ा योगदान, उत्पादन प्रभावित

रिपोर्ट्स के मुताबिक दुनिया में चुनिंदा देश ही हीलियम का उत्पादन करते हैं, जिनमें कतर अकेले करीब 35% वैश्विक सप्लाई करता है। 2 मार्च को ईरान के हमले के बाद उत्पादन प्रभावित हुआ, जिससे निर्यात में 14% की कमी आई और कीमतों में करीब 50% तक उछाल दर्ज किया गया।

तकनीकी और स्वास्थ्य क्षेत्र में अहम उपयोग

दरअसल हीलियम का इस्तेमाल सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री में वेफर को ठंडा रखने के लिए किया जाता है। इसके अलावा ऑप्टिकल फाइबर और स्मार्टफोन निर्माण में भी इसका व्यापक उपयोग होता है।

MRI मशीनों के संचालन पर भी असर की आशंका

असल में हीलियम गैस का उपयोग MRI मशीनों में लगे सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट को ठंडा रखने के लिए किया जाता है। भारत में वर्तमान में करीब 5,000 से 7,000 MRI मशीनें संचालित हैं, जो सार्वजनिक और निजी स्वास्थ्य संस्थानों में लगी हैं। इनमें से अधिकांश मशीनें विदेशों से आयात की गई हैं, जबकि कुछ को भारतीय कंपनियों द्वारा स्थानीय स्तर पर तैयार या नवीनीकृत किया गया है।

स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है प्रभाव

दरअसल MRI मशीनों के सुचारू संचालन में हीलियम की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए, इसकी कमी को लेकर स्वास्थ्य क्षेत्र में भी चिंता बढ़ गई है।

 

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