खाली पड़े पदों पर CJI सूर्यकांत ने जताई चिंता, सभी हाई कोर्ट को लिखा पत्र
Sandesh Wahak Digital Desk: CJI सूर्यकांत (CJI Suryakanth) ने देश के 25 उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों को पत्र लिखकर न्यायिक रिक्तियों को जल्द से जल्द भरने का निर्देश दिया है। सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने उच्च न्यायपालिका में खाली पड़े पदों पर चिंता जताते हुए समय रहते नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने को कहा है।
महिला न्यायाधीशों की पदोन्नति पर विशेष जोर
सीजेआई ने अपने पत्र में न्यायिक पीठों में विविधता सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया है। खासतौर पर महिला न्यायाधीशों के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के लिए उनकी पदोन्नति पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है।
सीजेआई सूर्यकांत ने मुख्य न्यायाधीशों से यह भी कहा है कि वे कॉलेजियम की सिफारिशों में अनावश्यक देरी न करें। साथ ही, वास्तविक रिक्ति उत्पन्न होने से पहले ही पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू करने पर जोर दिया गया है।
संस्थागत सुधारों की वकालत
आठ मार्च को आयोजित एक कार्यक्रम में सीजेआई ने न्यायपालिका में संस्थागत सुधारों की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि अधिक महिलाओं को विधि क्षेत्र में लाने के लिए ठोस कदम उठाने जरूरी हैं और महिला वकीलों को न्यायाधीश नियुक्त करने को एक सामान्य प्रक्रिया बनाया जाना चाहिए।
सीजेआई ने उच्च न्यायालयों के कॉलेजियम से अपने चयन दायरे को व्यापक बनाने और उन महिला अधिवक्ताओं के नामों पर भी विचार करने को कहा, जो विभिन्न राज्यों से आकर शीर्ष अदालत में वकालत कर रही हैं।
महिला न्यायाधीशों की वर्तमान स्थिति
उन्होंने बताया कि कई महिलाएं वर्तमान में विभिन्न उच्च न्यायालयों में मुख्य न्यायाधीश के पद पर कार्यरत हैं। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में 18 महिला न्यायाधीश हैं, जबकि मद्रास उच्च न्यायालय और बंबई उच्च न्यायालय में लगभग 12-12 महिला न्यायाधीश कार्यरत हैं। जिला स्तर पर भी महिलाओं की भागीदारी लगभग 36.3 प्रतिशत है।
केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल द्वारा फरवरी में लोकसभा में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2014 से अब तक उच्च न्यायालयों में 170 महिला न्यायाधीशों की नियुक्ति की गई है, जिनमें से 96 नियुक्तियां पिछले पांच वर्षों में हुई हैं। वहीं, सुप्रीम कोर्ट में अब तक छह महिला न्यायाधीश नियुक्त की गई हैं।
उच्च न्यायालयों में बड़ी संख्या में पद रिक्त
आंकड़ों के अनुसार, 6 फरवरी तक उच्च न्यायालयों में 1122 स्वीकृत पदों के मुकाबले 308 पद रिक्त थे। उस समय कुल 814 न्यायाधीश कार्यरत थे, जिनमें 116 महिला न्यायाधीश शामिल थीं। वहीं, शीर्ष अदालत में वर्तमान में एक महिला न्यायाधीश सहित कुल 33 न्यायाधीश कार्यरत हैं।
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