नेपाल की नई स्वास्थ्य मंत्री बनीं निशा मेहता, भारत से भी जुड़ा है गहरा संबंध
Sandesh Wahak Digital Desk: नेपाल की राजनीति में एक नई पीढ़ी का उभार देखने को मिल रहा है, जिसके तहत निशा मेहता (Nisha Mehta) को देश का नया स्वास्थ्य मंत्री नियुक्त किया गया है। 27 मार्च को उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री पद की शपथ ली और अब प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के नेतृत्व वाली सरकार में अहम जिम्मेदारी संभाल रही हैं।
नर्सिंग से राजनीति तक का सफर
निशा मेहता का करियर स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र से शुरू हुआ, जहां उन्होंने नर्सिंग पेशे में अपनी पहचान बनाई। इसके बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी से जुड़ गईं। पार्टी के शुरुआती दिनों से ही वह एक आम सदस्य के तौर पर सक्रिय रहीं और धीरे-धीरे संगठन में अपनी जगह मजबूत की।
2022 के आम चुनावों के दौरान राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी ने उन्हें अपनी आनुपातिक प्रतिनिधित्व सूची में शामिल किया था, लेकिन उस समय उन्हें संसद में जगह नहीं मिल सकी। हालांकि इस बार वह नई पीढ़ी के राजनीतिक चेहरों के रूप में संघीय संसद तक पहुंचीं और इसी के चलते उन्हें स्वास्थ्य मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई।
भारत से जुड़ा शैक्षणिक रिश्ता
निशा मेहता का भारत से भी गहरा नाता रहा है। उन्होंने दिल्ली स्थित भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के नर्सिंग महाविद्यालय से पढ़ाई की और 2006 से 2010 के बीच नर्सिंग में मास्टर डिग्री हासिल की। पढ़ाई पूरी करने के बाद वह नेपाल लौट आईं और स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में सक्रिय हो गईं।
नेपाल लौटने के बाद उन्होंने बिराटनगर के बिराट टीचिंग हॉस्पिटल में काम किया। इसके अलावा कोशी क्षेत्र में नेपाल पुलिस वाइव्स एसोसिएशन की प्रशासनिक सचिव के तौर पर भी जिम्मेदारी निभाई। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया और महिलाओं व बच्चों के कल्याण से जुड़े कई कार्यक्रमों में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की।
स्वास्थ्य बीमा प्रणाली बनी बड़ी चुनौती
स्वास्थ्य मंत्री के रूप में निशा मेहता के सामने सबसे बड़ी चुनौती नेपाल की स्वास्थ्य बीमा प्रणाली को सुधारना है। यह कार्यक्रम नागरिकों को किफायती और बेहतर स्वास्थ्य सेवा देने के उद्देश्य से शुरू किया गया था, लेकिन फिलहाल यह गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रहा है।
सरकार ने चालू वित्त वर्ष में इस योजना के लिए 10 अरब रुपये आवंटित किए थे, जबकि पिछले साल के बकाया भुगतान को निपटाने के लिए ही लगभग 11 अरब रुपये की जरूरत थी। इसके अलावा 1 अरब रुपये का अतिरिक्त अनुदान भी दिया गया, लेकिन वह भी पुराने बकायों में ही खर्च हो गया।
आय और खर्च के बीच बड़ा अंतर
स्वास्थ्य बीमा कार्यक्रम की सबसे बड़ी समस्या आय और खर्च के बीच का भारी अंतर है। प्रीमियम संग्रह केवल लगभग 3.5 अरब रुपये तक पहुंच पाया है, जबकि इस योजना पर हर महीने करीब 2 अरब रुपये और सालाना लगभग 24 अरब रुपये खर्च हो रहा है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर कोई स्थायी वित्तीय स्रोत नहीं मिला, तो इस योजना को जारी रखना मुश्किल हो सकता है।
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