‘नैतिक साहस है तो मंच पर आएं नीतीश’, तेजस्वी यादव की खुली चुनौती, इन आंकड़ों पर मांगा जवाब
Sandesh Wahak Digital Desk: बिहार की राजनीति में विकास के दावों को लेकर जुबानी जंग अब ‘आर-पार’ की लड़ाई में बदल गई है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राज्य के दोनों उपमुख्यमंत्रियों को विकास के मुद्दे पर सार्वजनिक मंच पर खुली बहस की चुनौती दी है। तेजस्वी ने सरकार पर पिछले दो दशकों में राज्य को आर्थिक और सामाजिक रूप से पीछे धकेलने का गंभीर आरोप लगाया है।
“नैतिक साहस है तो सामने आएं”: तेजस्वी की ललकार
तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया और प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा एनडीए के 21 वर्षों के शासन और 12 साल की ‘डबल इंजन’ सरकार के बावजूद बिहार शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रति व्यक्ति आय जैसे बुनियादी मानकों पर देश में सबसे नीचे है। उन्होंने मुख्यमंत्री को चुनौती दी कि अगर उनमें नैतिक साहस है, तो वे किसी भी समय और किसी भी सार्वजनिक मंच पर आंकड़ों के साथ बहस के लिए तैयार रहें।
बिहार की बदहाली पर उठाए 5 बड़े सवाल
तेजस्वी ने सरकार को घेरते हुए बिहार की मौजूदा स्थिति के कुछ चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए। उन्होंने दावा किया कि राज्य की लगभग 14 प्रतिशत आबादी आज भी झोपड़ियों में रहने को मजबूर है। देश में सबसे कम प्रति व्यक्ति उपभोग बिहार में है, जो गरीबी की गहराई को दर्शाता है। सरकार के ‘एक करोड़ रोजगार’ के दावे को उन्होंने पूरी तरह झूठा करार दिया। ‘साख-जमा अनुपात’ (Credit-Deposit Ratio) में बिहार का सबसे पीछे होना राज्य की कमजोर बैंकिंग और निवेश स्थिति को उजागर करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि बेहतर शिक्षा और इलाज के लिए आज भी बिहार के युवाओं और बुजुर्गों को दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता है।
सियासी हलचल तेज
तेजस्वी के इस बयान के बाद बिहार के राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है। जहाँ जदयू और भाजपा ने पलटवार करते हुए इसे ‘हवा-हवाई’ चुनौती बताया है, वहीं तेजस्वी ने स्पष्ट किया है कि जब तक सरकार वास्तविक समस्याओं को स्वीकार नहीं करेगी, तब तक राज्य का समग्र विकास संभव नहीं है।
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