न कांग्रेस, न भाजपा… नवजोत कौर सिद्धू ने चुन लिया अपना अलग रास्ता, पंजाब की सियासत में ‘तीसरा’ बड़ा मोड़?

Sandesh Wahak Digital Desk: पंजाब की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी और पूर्व विधायक डॉ. नवजोत कौर सिद्धू ने अपनी नई राजनीतिक पार्टी के गठन की घोषणा कर दी है। कांग्रेस से निष्कासित होने और भाजपा से तवज्जो न मिलने के बाद उन्होंने ‘भारतीय राष्ट्रवादी पार्टी’ (Bhartiya Rashtrawadi Party) के नाम से अपना नया सियासी संगठन चुनावी मैदान में उतारा है।

‘एक्स’ (X) पर आधी रात को किया पार्टी का एलान

सोमवार देर रात नवजोत कौर सिद्धू ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट ‘एक्स’ पर इस नई पारी की आधिकारिक घोषणा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि मौजूदा राजनीतिक नेतृत्व के कामकाज का गहराई से मूल्यांकन करने के बाद उन्होंने जनता के लिए एक ‘राष्ट्रीय विकल्प’ तैयार करने का निर्णय लिया है।

कांग्रेस से क्यों हुईं बाहर? 500 करोड़ के दावे ने मचाया था बवाल

अमृतसर ईस्ट से विधायक रहीं नवजोत कौर सिद्धू उस वक्त सुर्खियों में आईं थीं, जब उन्होंने दावा किया था कि कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद की दावेदारी के लिए 500 करोड़ रुपये दिए गए थे। उनके इस विस्फोटक बयान से कांग्रेस हाईकमान बेहद असहज हो गया था। इसके बाद उन्हें पहले निलंबित किया गया और फिर पार्टी से स्थाई रूप से निष्कासित कर दिया गया। निष्कासन के बाद उन्होंने भाजपा के साथ नजदीकियां बढ़ाने की कोशिश की, लेकिन वहां से भी हरी झंडी नहीं मिली। वहीं, नवजोत सिंह सिद्धू को भी राहुल गांधी से मिलने का समय नहीं मिल सका।

‘भारतीय राष्ट्रवादी पार्टी’ का क्या है विजन?

नवजोत कौर ने अपने संदेश में ‘सत्य और प्रेम’ के मार्ग पर चलने की बात कही है। उनके मुख्य उद्देश्य इस प्रकार हैं।

न्याय और शांति: समान विचारधारा वाले लोगों के साथ मिलकर हर राज्य में न्याय और सेवा के लक्ष्य पर काम करना।

पुरानी पहचान: पंजाब और देश को उसकी वह पुरानी पहचान दिलाना, जहां साझा संस्कृति और स्वतंत्रता की भावना सर्वोपरि हो।

जनता की सरकार: उन्होंने ‘जनता की, जनता के लिए और जनता द्वारा’ सरकार देने का संकल्प दोहराया है।

नवजोत सिंह सिद्धू का क्या होगा रुख?

सबसे दिलचस्प बात यह है कि जहां नवजोत कौर ने अपनी अलग पार्टी बना ली है, वहीं उनके पति नवजोत सिंह सिद्धू अभी भी आधिकारिक तौर पर कांग्रेस में ही बने हुए हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि क्या सिद्धू भी जल्द ही अपनी पत्नी की पार्टी का दामन थामेंगे या कांग्रेस में ही अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।

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