‘कांशीराम के नाम, कांग्रेस का पैगाम’ सत्ता में आए तो देंगे ‘भारत रत्न’, बसपा के गढ़ में राहुल गांधी की एंट्री
Sandesh Wahak Digital Desk: असम विधानसभा चुनाव के मतदान और उत्तर प्रदेश की बदलती राजनीतिक फिजां के बीच कांग्रेस ने एक बड़ा दांव चला है। कांग्रेस के अनुसूचित जाति (SC) विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम ने मंगलवार को स्पष्ट एलान किया कि यदि वर्तमान मोदी सरकार बसपा संस्थापक कांशीराम को मरणोपरांत ‘भारत रत्न’ नहीं देती है, तो केंद्र में कांग्रेस की सरकार बनने पर उन्हें इस सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजा जाएगा।
कांशीराम का कद और सामाजिक न्याय का सवाल
राजेंद्र पाल गौतम ने मीडिया से बातचीत में कांशीराम के योगदान को अतुलनीय बताया। उन्होंने तर्क दिया कि वर्तमान सरकार ने ऐसे कई लोगों को ‘भारत रत्न’ दिया है जिनका कद और योगदान शायद कांशीराम साहब से बड़ा नहीं था। गौतम ने कहा, “कांशीराम साहब ने बहुजन समाज में जो राजनीतिक जागरूकता पैदा की, उसने देश की दिशा बदल दी। उनके सम्मान में कोई अड़चन नहीं आनी चाहिए।”
अतीत की गलतियों पर सफाई और भविष्य का रोडमैप
जब गौतम से सवाल किया गया कि कांग्रेस ने अपने शासनकाल में यह कदम क्यों नहीं उठाया, तो उन्होंने बेबाकी से जवाब दिया। “अगर सामाजिक न्याय के कार्यों के दौरान कांग्रेस से कुछ चीजें छूट गई थीं और आज वह उन्हें ठीक करना चाहती है, तो किसी को आपत्ति क्यों होनी चाहिए?”
उन्होंने जोर दिया कि आज कांग्रेस संगठन में SC, ST, OBC और अल्पसंख्यकों के लिए 50 प्रतिशत पद आरक्षित हैं, जिससे दलित समाज फिर से कांग्रेस से जुड़ रहा है।
बसपा और भाजपा पर तीखा प्रहार
दलित वोटबैंक को लेकर पूछे गए सवाल पर राजेंद्र पाल गौतम ने बसपा प्रमुख मायावती की राजनीति पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि दलित समाज किसी की ‘जेब’ में नहीं है। यह गलतफहमी दूर होनी चाहिए कि दलित केवल एक दल के साथ हैं। गौतम ने आरोप लगाया कि बसपा ने कहीं न कहीं समझौता कर लिया है और वह लगातार भाजपा के पक्ष में बोल रही है, जिससे दलित समाज में नाराजगी है।
राहुल गांधी की मुहिम को मिला बल
गौरतलब है कि पिछले महीने ही कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कांशीराम को ‘भारत रत्न’ देने की औपचारिक मांग की थी। कांग्रेस का यह कदम सीधे तौर पर उत्तर प्रदेश और पंजाब जैसे राज्यों में बसपा के आधार वोटबैंक (जाटव और अन्य दलित वर्ग) में सेंध लगाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
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