यूपी में बजट का पैसा खर्च करने में फिसड्डी रह गए विभाग, 32% फंड रह गया बेकार
Lucknow News: उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने और विकास कार्यों को जमीन पर उतारने की सरकार की कोशिशों को विभागों की सुस्ती ने बड़ा झटका दिया है। पिछले वित्तीय वर्ष (2025-26) में विकास कार्यों के लिए आवंटित भारी-भरकम बजट का एक बड़ा हिस्सा बिना इस्तेमाल हुए ही रह गया। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, विकास कार्यों (पूंजीगत व्यय) के लिए दिए गए कुल बजट का केवल 67.45 प्रतिशत ही खर्च हो पाया है, जबकि 32 प्रतिशत से ज्यादा की धनराशि धरी की धरी रह गई।
वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान विकास कार्यों के लिए 2.59 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। सरकार को उम्मीद थी कि इस पैसे से प्रदेश की सूरत बदलेगी, लेकिन विभाग केवल 1.75 लाख करोड़ रुपये ही इस्तेमाल कर सके।
पिछड़ने वाले विभाग: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पीडब्ल्यूडी (भवन), सिंचाई, कारागार और मत्स्य जैसे विभागों का प्रदर्शन बेहद खराब रहा। ये विभाग अपने आवंटित बजट का 50 प्रतिशत हिस्सा भी खर्च नहीं कर पाए।
मिसाल पेश करने वाले विभाग: दूसरी ओर, स्वास्थ्य (परिवार कल्याण), होमगार्ड, समाज कल्याण और पर्यटन विभाग ने शानदार काम किया। इन्होंने 90 प्रतिशत से ज्यादा बजट खर्च कर विकास को रफ्तार दी।
अगले साल चुनाव, अब एक्शन मोड में सरकार
उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं, जिसे देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद विकास कार्यों की कमान संभाले हुए हैं। सीएम लगातार समीक्षा बैठकें कर रहे हैं, लेकिन विभागों की इस उदासीनता ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। अब सरकार ने इस सुस्ती को गंभीरता से लिया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अभी से कमर कस ली गई है। सभी विभागों से उनकी कार्ययोजना (Action Plan) तुरंत मांगी गई है। लक्ष्य है कि अगले महीने से ही नई और लंबित योजनाओं पर काम युद्ध स्तर पर शुरू हो जाए।
एक नजर आंकड़ों पर (2025-26)
| विवरण | कुल आवंटन (करोड़ ₹) | कुल खर्च (करोड़ ₹) | प्रतिशत खर्च |
| कुल बजट | 8,79,935.44 | 6,61,200.87 | 75.1% |
| पूंजीगत व्यय (विकास) | 2,59,487.38 | 1,75,013.35 | 67.45% |
| राजस्व व्यय | 6,20,448.05 | 4,86,194.51 | 78.36% |
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