LPG संकट के चलते सूरत से अपने घरों को लौट रहे मजदूरों पर पुलिस ने भांजी लाठियां

Sandesh Wahak Digital Desk: इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव का असर अब भारत के औद्योगिक केंद्रों पर साफ दिखने लगा है। पश्चिम एशिया (मिडिल-ईस्ट) में जारी संघर्ष की वजह से पैदा हुए एलपीजी संकट ने सूरत के कपड़ा और हीरा उद्योगों की कमर तोड़ दी है। गैस की किल्लत के कारण कई इकाइयों में ताले लग गए हैं, जिसके चलते उत्तर प्रदेश और बिहार के मजदूरों का बड़े पैमाने पर पलायन शुरू हो गया है। रविवार को सूरत के उधना रेलवे स्टेशन पर इसी पलायन और गर्मी की छुट्टियों की भीड़ के चलते भगदड़ जैसे हालात बन गए।

स्टेशन पर मची चीख-पुकार, जालियों से कूदे यात्री

रविवार सुबह करीब 11 बजे उधना-हसनपुर ट्रेन पकड़ने के लिए हजारों की संख्या में यात्री स्टेशन पहुंच गए। आरपीएफ और पुलिस के जवानों ने यात्रियों को कतार में खड़ा करने की कोशिश की, लेकिन सीट पाने की होड़ में लोगों ने बैरिकेड्स और लाइन तोड़ दी। स्थिति को बेकाबू होता देख पुलिस और आरपीएफ ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए हल्का बल प्रयोग (लाठीचार्ज) किया। लाठीचार्ज होते ही भगदड़ मच गई और लोग खुद को बचाने के लिए रेलवे स्टेशन की लोहे की ऊंची जालियों से कूदकर भागते नजर आए।

रेलवे अधिकारियों और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, इस भारी भीड़ के पीछे दो प्रमुख कारण हैं। पिछले दो-तीन महीनों से ईंधन (एलपीजी) की भारी किल्लत है। कच्चे माल की कमी और गैस संकट से कारखाने बंद हो रहे हैं, जिससे मजदूरों के पास काम नहीं बचा है। गर्मियों की छुट्टियों के कारण भी सामान्य दिनों की तुलना में यात्रियों की संख्या दोगुनी हो गई है।

रेलवे की व्यवस्था और विशेष ट्रेनें

बढ़ती भीड़ को देखते हुए रेलवे ने अतिरिक्त इंतजाम करने का दावा किया है। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, समर सीजन के लिए अब तक 6 स्पेशल ट्रेनें चलाई जा चुकी हैं। रेलवे अधिकारी ने बताया कि बल प्रयोग की नौबत इसलिए आई क्योंकि कुछ यात्रियों ने सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन कर लाइन तोड़ने की कोशिश की थी। हमारा उद्देश्य केवल व्यवस्था और सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

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