मोदी सरकार के 12 साल, पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर मल्लिकार्जुन खड़गे का तीखा हमला
Sandesh Wahak Digital Desk: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने देश की सत्ता में अपने सफल 12 साल पूरे कर लिए हैं। 26 मई 2014 को पीएम मोदी ने पहली बार देश के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली थी। जहां एक तरफ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) इस पड़ाव को एक बड़ी ऐतिहासिक उपलब्धि के तौर पर मना रही है, वहीं दूसरी तरफ मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस मौके पर महंगाई के मुद्दे को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने ईंधन की बढ़ती कीमतों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है।
खड़गे ने गिनाए 2014 बनाम 2026 के आंकड़े
मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पहले ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा, हाथ कंगन को आरसी क्या, पढ़े-लिखे को फारसी क्या! उन्होंने प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के आधिकारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए 12 साल में तेल की कीमतों के अंतर को उजागर किया। ईंधन की कीमतों में आए इस बड़े अंतर को नीचे दी गई तालिका से आसानी से समझा जा सकता है।
| मानक / ईंधन | 26 मई 2014 (सत्ता संभालने के वक्त) | वर्तमान स्थिति (मई 2026) | बदलाव की स्थिति |
| कच्चा तेल (क्रूड ऑयल) | $108.05 प्रति बैरल | $99 प्रति बैरल से कम | कच्चा तेल सस्ता हुआ |
| डॉलर-रुपया विनिमय दर | ₹58.59 प्रति डॉलर | – | – |
| पेट्रोल की कीमत | ₹71.51 प्रति लीटर | ₹102.12 प्रति लीटर | लगभग 42.8% महंगा |
| डीजल की कीमत | ₹56.71 प्रति लीटर | ₹95.20 प्रति लीटर | लगभग 67.9% महंगा |
कांग्रेस अध्यक्ष ने दावा किया कि वैश्विक बाजार में कच्चा तेल सस्ता होने के बावजूद देश के आम नागरिकों को इसका कोई फायदा नहीं दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें घटी हैं, तो घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल के दाम कम क्यों नहीं किए गए? खड़गे ने कहा कि हर अर्थशास्त्री इस बात से वाकिफ है कि ईंधन की महंगाई का सीधा असर लॉजिस्टिक्स, ट्रांसपोर्टेशन और खाद्य वस्तुओं पर पड़ता है, जिससे आम आदमी की जेब पर चौतरफा मार पड़ती है।
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