अमेरिका की मध्यस्थता में इजरायल और लेबनान युद्धविराम पर राजी
Sandesh Wahak Digital Desk: मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी सैन्य टकराव के बीच राहत भरी खबर सामने आई है। अमेरिका की सफल मध्यस्थता के बाद इजरायल और लेबनान वाशिंगटन में ऐतिहासिक युद्धविराम लागू करने पर सहमत हो गए हैं। अमेरिकी विदेश विभाग में दो और तीन जून को आयोजित चौथी उच्च स्तरीय त्रिपक्षीय बैठक के बाद इस शांति समझौते पर मुहर लगी। अमेरिकी विदेश विभाग के काउंसलर डैन हॉलर ने इस महत्वपूर्ण निर्णय की आधिकारिक घोषणा करते हुए बताया कि दोनों संप्रभु राष्ट्रों ने भविष्य में भी सीधे संवाद जारी रखने और दक्षिणी लेबनान में किसी भी गैर-सरकारी सशस्त्र समूह की वापसी को रोकने का दृढ़ संकल्प लिया है।
युद्धविराम की कड़ी शर्तें तय
तीनों देशों द्वारा जारी संयुक्त बयान के अनुसार, इस युद्धविराम के प्रभावी होने के लिए कुछ बेहद कड़े सुरक्षा मानक तय किए गए हैं। इसके तहत सबसे प्रमुख शर्त यह है कि हिज्बुल्लाह की ओर से सीमा पर की जा रही गोलाबारी पूरी तरह बंद होनी चाहिए और उसके सभी लड़ाकों को दक्षिण लिटानी क्षेत्र से पीछे हटना होगा। इसके अतिरिक्त, सीमावर्ती क्षेत्रों में जल्द ही कुछ विशेष पायलट जोन स्थापित किए जाएंगे, जहां किसी भी गैर-सरकारी सशस्त्र संगठन की मौजूदगी प्रतिबंधित होगी और वहां का पूरा सुरक्षा नियंत्रण लेबनान की आधिकारिक सेना संभालेगी।
यह पूरा सुरक्षा खाका 29 मई को पेंटागन में हुई रणनीतिक चर्चाओं पर आधारित है, जिसका उद्देश्य दोनों देशों की क्षेत्रीय अखंडता को अक्षुण्ण रखना है। बैठक के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के उस बयान को भी दोहराया गया, जिसमें उन्होंने हिज्बुल्लाह को अमेरिका, इजरायल और लेबनान का साझा दुश्मन बताया था। वार्ता में जहां इजरायल ने अपनी दीर्घकालिक सुरक्षा के लिए हिज्बुल्लाह के पूर्ण निरस्त्रीकरण और उसके बुनियादी ढांचे को नष्ट करने की मांग दोहराई, वहीं लेबनान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सीमाओं के आपसी सम्मान और अपनी संप्रभुता के सिद्धांतों पर जोर दिया। वाशिंगटन ने लेबनानी सेना की क्षमता बढ़ाने के लिए अपना समर्थन जारी रखने की प्रतिबद्धता भी जताई है।
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