Lucknow में अब नहीं होगी मनमानी प्लॉटिंग, LDA ने जमीन कारोबारियों पर कसा शिकंजा

Lucknow News: राजधानी में प्रस्तावित IT City और Wellness City परियोजनाओं को लेकर लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने बड़ा कदम उठाया है। प्राधिकरण की सिफारिश पर शासन ने इन योजनाओं के पहले चरण में शामिल जमीनों की खरीद-बिक्री और हस्तांतरण पर रोक लगा दी है। अब अधिसूचित क्षेत्रों में जिला कलेक्टर की अनुमति के बिना कोई भी व्यक्ति जमीन न खरीद सकेगा और न ही बेच सकेगा।

LDA के मुताबिक, हाल के दिनों में कुछ निवेशक और प्रॉपर्टी डीलर बड़े पैमाने पर कृषि भूमि खरीदने में जुटे थे। आशंका थी कि इससे मूल किसानों और भू-स्वामियों के हित प्रभावित हो सकते हैं, साथ ही परियोजनाओं के क्रियान्वयन में भी दिक्कतें आ सकती हैं। इसी वजह से शासन को धारा-11 लागू करने का प्रस्ताव भेजा गया था, जिसे मंजूरी मिल गई है।

उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि अधिसूचना जारी होने के बाद प्रभावित क्षेत्र में जमीन के हस्तांतरण, बिक्री और खरीद पर नियंत्रण रहेगा। साथ ही स्थानीय लोगों और भू-स्वामियों को अपनी आपत्तियां और सुझाव देने के लिए 60 दिनों का समय दिया जाएगा। इस दौरान मिलने वाले सुझावों और आपत्तियों पर जिला प्रशासन सुनवाई करेगा।

लैंड पूलिंग का विकल्प रहेगा, लेकिन ये शर्त होगी लागू

LDA के अनुसार, IT City और Wellness City दोनों योजनाओं में भूमि जुटाने के लिए लैंड पूलिंग, किसानों की सहमति से खरीद और भूमि अर्जन जैसे विकल्प अपनाए जाएंगे। हालांकि लैंड पूलिंग नीति का लाभ केवल उन्हीं भू-स्वामियों को मिलेगा, जिनका नाम वर्तमान राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज है। अधिसूचना जारी होने के बाद जमीन खरीदने वाले नए लोगों को इस योजना का फायदा नहीं मिलेगा।

Lucknow में अब नहीं होगी मनमानी प्लॉटिंग, LDA ने जमीन कारोबारियों पर कसा शिकंजा

IT City परियोजना के पहले चरण में करीब 686.66 हेक्टेयर भूमि विकसित की जानी है। इसके लिए बक्कास, सोनई कंजेहरा, सिकंदरपुर अमोलिया, सिद्धपुरा, परेहटा, पहाड़नगर टिकरिया, रकीबाबाद, मोहारी खुर्द, खुजौली और भटवारा गांवों की जमीन को अधिसूचना के दायरे में लाया गया है।

वहीं Wellness City परियोजना के पहले चरण में करीब 485 हेक्टेयर क्षेत्र विकसित किया जाएगा। इसके तहत बक्कास, मलूकपुर ढकवा, चौरहिया, चौरासी, दुलारमऊ, नूरपुर बेहटा और मस्तेमऊ गांवों की भूमि पर भी धारा-11 लागू की गई है।

LDA का कहना है कि इस फैसले से जमीन की कीमतों में कृत्रिम बढ़ोतरी पर रोक लगेगी, किसानों के हित सुरक्षित रहेंगे और दोनों महत्वाकांक्षी परियोजनाओं का विकास अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से हो सकेगा।

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