Inflation और अल-नीनो बढ़ाएंगे भारत की आर्थिक मुश्किलें, महंगाई पर आई चिंताजनक रिपोर्ट
India Inflation: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और महंगाई के दबाव के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने नई चुनौती खड़ी होती दिख रही है। एक ताजा रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि बढ़ती Inflation और संभावित अल-नीनो प्रभाव मिलकर आने वाले समय में उपभोक्ता मांग और आर्थिक गतिविधियों पर बड़ा असर डाल सकते हैं। अनुमान है कि इससे देश पर 4 से 5 लाख करोड़ रुपये तक का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ सकता है।
ब्रोकरेज फर्म प्रभुदास लीलाधर की रिपोर्ट के मुताबिक, 2027 की दूसरी तिमाही से महंगाई और कमजोर मानसून का असर बाजार में मांग को धीमा कर सकता है। खासकर कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और वैश्विक सप्लाई चेन में बाधाओं के कारण पेट्रोल-डीजल, एलपीजी, एफएमसीजी, डेयरी उत्पाद, केमिकल, ऑटोमोबाइल और ड्यूरेबल सामानों की कीमतों में और बढ़ोतरी की आशंका है।
सब्सिडी का बोझ बढ़ने की चेतावनी
रिपोर्ट के अनुसार, बढ़ती वैश्विक कीमतों का असर सरकारी खजाने पर भी पड़ सकता है। उर्वरक, खाद्य और ईंधन सब्सिडी का खर्च तेजी से बढ़ने की संभावना है, जबकि पेट्रोलियम उत्पादों से मिलने वाले एक्साइज ड्यूटी राजस्व में कमी आ सकती है।
अनुमान है कि अगले वित्त वर्ष में उर्वरक सब्सिडी बिल बढ़कर करीब 3.4 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है, जो वर्तमान में लगभग 1.7 लाख करोड़ रुपये है। वहीं खाद्य सब्सिडी बिल भी बढ़कर 2.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।
हालांकि उर्वरक मंत्रालय की अपर सचिव अपर्णा एस शर्मा ने संकेत दिए हैं कि वैश्विक कीमतों में नरमी आने पर सब्सिडी के अनुमान की दोबारा समीक्षा की जा सकती है।
शेयर बाजार और रुपये पर भी दबाव
रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम एशिया संकट और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। निफ्टी पिछले दो महीनों में 7.2 फीसदी तक फिसल चुका है और अपने 52 सप्ताह के उच्च स्तर से 15 फीसदी से अधिक नीचे आ गया है।
इसके अलावा विदेशी निवेशकों की बिकवाली, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और रेमिटेंस पर दबाव के कारण रुपये पर भी लगातार दबाव बना हुआ है।
Repo Rate बढ़ने की संभावना
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि महंगाई (Inflation) का दबाव लंबे समय तक बना रहा तो RBI को 2027 की दूसरी छमाही में Repo Rate बढ़ाने पर विचार करना पड़ सकता है। हालांकि फिलहाल भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर मजबूत बनी हुई है, लेकिन वैश्विक परिस्थितियां भविष्य में नई चुनौतियां पैदा कर सकती हैं।
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