Lucknow News: डब्लूपीयू गोवा ने की ट्रांसडिसिप्लिनरी शिक्षा की वकालत, पहली नौकरी से आगे सोचने की ज़रूरत

Lucknow News: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और तेजी से बदलते तकनीकी परिदृश्य के इस दौर में उच्च शिक्षा के पारंपरिक तौर-तरीकों को बदलने की मांग तेज हो गई है। वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी (WPU) गोवा में आयोजित एक विशेष ओपन हाउस कार्यक्रम में वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि विश्वविद्यालयों को अब छात्रों को सिर्फ उनकी पहली नौकरी के लिए तैयार करने की सोच से बाहर निकलना होगा। तकनीक में हो रही तीव्र उथल-पुथल के बीच अब छात्रों को इस तरह सक्षम बनाना ज़रूरी है कि वे अपने जीवन में करियर के विभिन्न बदलावों और अप्रत्याशित चुनौतियों को सफलतापूर्वक संभाल सकें।

इस ओपन हाउस कार्यक्रम में भविष्य के करियर, बदलती तकनीकी दुनिया और विश्वविद्यालयों से समाज की अपेक्षाओं पर मंथन करने के लिए भावी छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों को एक साझा मंच पर लाया गया। इस पूरी परिचर्चा के केंद्र में डब्लूपीयू गोवा का ‘ट्रांसडिसिप्लिनरी’ (बहुविषयक) शिक्षा मॉडल रहा, जो किसी एक विषय की गहराई को विभिन्न क्षेत्रों में सोचने और व्यावहारिक समाधान खोजने की क्षमता से जोड़ता है।

डब्लूपीयू गोवा ने की ट्रांसडिसिप्लिनरी शिक्षा की वकालत

बहुआयामी प्रतिभा वाले युवाओं का है भविष्य

डब्लूपीयू गोवा के वाइस चांसलर प्रोफेसर वाल्टर लील ने कहा, यूनिवर्सिटी की स्थापना एक ऐसे ट्रांसडिसिप्लिनरी दृष्टिकोण के साथ की जा रही है जो फैकल्टी और छात्रों को किसी एक विषय की संकीर्ण सीमाओं से परे जाकर सोचने के लिए प्रेरित करता है। हमारा ध्यान व्यावहारिक अनुभव, उद्योग जगत से जुड़ाव और वैश्विक दृष्टि पर है, ताकि छात्र निजी और सरकारी दोनों क्षेत्रों में नेतृत्व कर सकें।

प्रो-वाइस चांसलर डॉ. आशीष भारद्वाज ने वर्तमान शिक्षा प्रणाली को चुनौती देते हुए कहा, भविष्य केवल उन लोगों का नहीं है जो किसी एक विषय के विशेषज्ञ हैं, बल्कि उनका है जो निरंतर नया सीख सकते हैं, अलग-अलग क्षेत्रों के विचारों को आपस में जोड़ सकते हैं और ऐसी जटिल चुनौतियों का सामना कर सकते हैं जो किसी पारंपरिक श्रेणी में फिट नहीं बैठतीं।

इस परिचर्चा में इस बात पर भी प्रकाश डाला गया कि आज उद्योग जगत इतनी तेजी से बदल रहे हैं कि जिज्ञासा, लचीलापन और नई परिस्थितियों के अनुकूल खुद को ढालना, किसी तकनीकी विशेषज्ञता जितना ही महत्वपूर्ण हो गया है। इसलिए उच्च शिक्षा संस्थानों को अब केवल मौजूदा नौकरियों के लिए प्रशिक्षण देने के बजाय उन अवसरों के लिए युवाओं को तैयार करना चाहिए जिनकी भविष्यवाणी आज नहीं की जा सकती।

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