हर प्रेम संबंध का नतीजा शादी होना जरूरी नहीं, हाई कोर्ट का अहम बयान
Allahabad High Court: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि हर प्रेम संबंध का नतीजा शादी होना जरूरी नहीं है और केवल शादी का वादा पूरा न होने को रेप नहीं माना जा सकता। अदालत ने गुरुवार को एक ऐसे मामले में दर्ज FIR को रद्द कर दिया, जिसमें शादी का झूठा वादा कर रेप का आरोप लगाया गया था।
कोर्ट ने साफ कहा कि जब दो बालिग और पढ़े-लिखे लोग आपसी सहमति से संबंध बनाते हैं, तो बाद में रिश्ता टूटने को अपराध का रूप नहीं दिया जा सकता। अदालत की यह टिप्पणी अब कानूनी और सामाजिक दोनों स्तर पर चर्चा का विषय बन गई है।
कोर्ट ने अपने 34 पन्नों के फैसले में कहा कि लंबे समय तक आपसी सहमति से बने संबंध को केवल शादी न होने की वजह से रेप नहीं कहा जा सकता। अदालत ने कहा कि यदि दोनों पक्षों ने स्वेच्छा से संबंध बनाए हैं तो यह अपराध की श्रेणी में नहीं आता। अदालत ने यह भी माना कि इस मामले में दोनों के बीच संबंध सहमति से बने थे और रिकॉर्ड में ऐसा कोई मजबूत आधार नहीं मिला जिससे आरोपी पर रेप का आरोप साबित हो सके।
FIR को बताया दबाव बनाने का माध्यम
अदालत ने यह भी कहा कि यह FIR नाराजगी के कारण दर्ज की गई थी और बाद में पीड़िता ने आरोपी से शादी भी कर ली, जिससे यह संकेत मिलता है कि मामला दबाव बनाने के लिए दर्ज किया गया था। कोर्ट ने इसे ‘दुर्लभ से दुर्लभतम’ मामलों में रखते हुए कहा कि इस तरह की कार्यवाही जारी रखना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। इसलिए ट्रायल कोर्ट में चल रहे पूरे मुकदमे को रद्द कर दिया गया।
यह मामला प्रयागराज के कर्नलगंज थाना क्षेत्र का है। महिला 2014 में पढ़ाई के लिए प्रयागराज आई थी, जहां उसकी मुलाकात अपने दूर के रिश्तेदार से हुई। धीरे-धीरे दोनों के बीच संबंध बने। महिला ने आरोप लगाया था कि शादी का वादा कर उसके साथ संबंध बनाए गए और बाद में इनकार कर दिया गया। साथ ही मारपीट, धमकी और ब्लैकमेल के आरोप भी लगाए गए थे। हालांकि कोर्ट ने सभी परिस्थितियों और सबूतों को देखने के बाद आरोपी को राहत दी।

