ट्रंप की धमकी से भड़का ईरान, वार्ता बीच में छोड़ी, बोला- पहले लेबनान में युद्ध रुके तभी बात होगी

US Iran Talk: अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में चल रही हाई-लेवल शांति वार्ता एक बार फिर तनाव के घेरे में आ गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई धमकियों के बाद ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने पहले दौर की बातचीत के दौरान विरोध जताते हुए कुछ समय के लिए बैठक छोड़ दी। इसके साथ ही ईरान ने साफ कर दिया है कि लेबनान में युद्धविराम (Ceasefire) लागू हुए बिना वह किसी अन्य मुद्दे पर आगे की बातचीत नहीं करेगा।

ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप के हालिया बयानों को बातचीत के माहौल के खिलाफ बताते हुए ईरानी प्रतिनिधियों ने नाराजगी जताई। इतना ही नहीं, उन्होंने अमेरिकी अधिकारियों के साथ प्रस्तावित संयुक्त फोटो सेशन में भी हिस्सा लेने से इनकार कर दिया।

बताया जा रहा है कि वार्ता (US-Iran Talks) शुरू होने से पहले दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच औपचारिक तस्वीर और हाथ मिलाने का कार्यक्रम तय था, लेकिन ईरान के वरिष्ठ नेताओं ने इससे दूरी बना ली। इसके बाद ईरानी पक्ष ने अमेरिकी प्रतिनिधियों के सामने औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई और फिर बातचीत शुरू हुई।

लेबनान बना सबसे बड़ा मुद्दा

पहले दौर की वार्ता पूरी होने के बाद ईरान ने साफ संदेश दिया कि जब तक लेबनान में इजरायली सैन्य कार्रवाई नहीं रुकती, तब तक किसी अन्य विषय पर बातचीत आगे नहीं बढ़ेगी।

ईरानी प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने कहा कि क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए सबसे पहले लेबनान संकट का समाधान जरूरी है। उनका कहना है कि युद्ध जारी रहने की स्थिति में परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों या आर्थिक मुद्दों पर आगे बढ़ना संभव नहीं होगा।

ट्रंप ने क्या दी चेतावनी?

US-Iran Talks के दौरान ही ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर पोस्ट करते हुए ईरान को कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि ईरान को लेबनान में अपने समर्थित समूहों की गतिविधियां तुरंत रोकनी चाहिए। ऐसा नहीं होने पर अमेरिका पहले से ज्यादा सख्त सैन्य कार्रवाई कर सकता है।

इसके अलावा ट्रंप ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर भी बयान दिया और कहा कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर नियंत्रण करने की क्षमता रखता है।

ट्रंप के इन बयानों के बाद वार्ता स्थल पर तनाव और बढ़ गया, जिसका असर सीधे बातचीत पर देखने को मिला।

ईरान का पलटवार

अमेरिकी राष्ट्रपति की चेतावनी पर ईरान ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा कि अमेरिका की धमकियों का उन पर कोई असर नहीं पड़ता। उन्होंने कहा कि ईरान की सशस्त्र सेनाएं हर स्थिति का जवाब देने के लिए तैयार हैं और वॉशिंगटन को अपने शब्दों का चयन सावधानी से करना चाहिए।

पहले दौर की वार्ता में क्या हुआ?

पहले दौर की बातचीत में युद्ध समाप्त करने, आर्थिक प्रतिबंधों में राहत और विदेशों में फ्रीज ईरानी फंड्स को जारी करने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। ईरानी मीडिया का दावा है कि तेल निर्यात पर लगे कुछ प्रतिबंधों में राहत देने से जुड़े मसौदे पर महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।

इसके अलावा कतर के बैंकों में फंसे करीब 6 अरब डॉलर (6 Billion Dollar Fund) की वापसी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। ईरान का कहना है कि यह राशि समझौते के तहत उसे वापस मिल सकती है।

परमाणु बम पर क्या बोला ईरान?

ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने वार्ता से पहले कहा कि उनका देश परमाणु बम (Nuclear Bomb) नहीं चाहता। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका की मुख्य चिंता भी यही है और इस संबंध में ईरान पहले ही अपने रुख को स्पष्ट कर चुका है।

हालांकि पहले दौर (US-Iran Talks) की बातचीत के बावजूद दोनों देशों के बीच कई बड़े मतभेद बने हुए हैं। ऐसे में अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि लेबनान संकट और ट्रंप की सख्त बयानबाजी के बीच यह वार्ता आगे बढ़ पाती है या नहीं।

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