राजेश एक्सपोर्ट्स पर ईडी का शिकंजा, फेमा उल्लंघन मामले में बेंगलुरु और मुंबई के 9 ठिकानों पर छापेमारी
Sandesh Wahak Digital Desk: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के कथित उल्लंघन के मामले में दिग्गज कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड (REL) और उसके प्रमोटरों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने बुधवार को जारी एक आधिकारिक बयान में बताया कि बेंगलुरु और मुंबई स्थित कंपनी के 9 अलग-अलग परिसरों पर व्यापक तलाशी और जब्ती अभियान चलाया गया। इस जांच के दौरान कई ऐसी गंभीर वित्तीय अनियमितताएं और चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं, जिसने जांच अधिकारियों को भी हैरान कर दिया है।
ईडी के मुताबिक, कंपनी अपने बड़े विदेशी लेनदेन, आयात-निर्यात और विदेशी निवेश से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज व वित्तीय रिकॉर्ड पेश करने में पूरी तरह नाकाम रही है। ईडी की इस सघन छापेमारी और जांच में सामने आए मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं।
लापता दस्तावेज: कंपनी अफ्रीकी खदानों (African Mines) में किए गए अपने 1,035 करोड़ रुपये के भारी-भरकम निवेश से जुड़े कागजात न तो छापेमारी के दौरान दिखा पाई और ना ही बाद में उपलब्ध करा सकी।
सैलरी का हैरान करने वाला गणित: कंपनी ने लगभग 7.7 लाख करोड़ रुपये का समेकित राजस्व (Consolidated Revenue) दिखाया है, लेकिन इसके विपरीत कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) की सैलरी महज 17,000 रुपये प्रति माह दर्ज है। यही नहीं, कंपनी के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) को साल 2020 से कोई वेतन ही नहीं दिया गया है।
संदिग्ध ऑफशोर लिंक और बेनामी शेयर: जांच में यूएई (UAE) की संदिग्ध कंपनियों के जरिए करीब 3,000 करोड़ रुपये के लेनदेन के समायोजन (Set-off) का पता चला है। इसके साथ ही, कथित तौर पर एनआरआई बेनामीदारों की मदद से शेयरों में हेरफेर कर 600 करोड़ रुपये से अधिक की रकम भारत से बाहर भेजने की बात भी सामने आई है। कुछ संदिग्ध शेयर ट्रेडर्स के नाम ‘आईसीआईजे’ (ICIJ) के ग्लोबल लीक में भी शामिल हैं।
स्टॉक में भारी अंतर: जब ईडी की टीम ने कंपनी के कारखानों में भौतिक सत्यापन (Physical Verification) किया, तो फैक्ट्री रजिस्टर में दर्ज स्टॉक और मौके पर मौजूद वास्तविक स्टॉक के बीच करीब 40 प्रतिशत का भारी अंतर पाया गया।

