शशि थरूर ने पासपोर्ट-नागरिकता विवाद में सरकार को घेरा, आधार कार्ड पर दिया सुझाव
Shashi Tharoor Passport Controversy: विदेश मंत्रालय (MEA) की ओर से पासपोर्ट को लेकर दिए गए हालिया स्पष्टीकरण के बाद देश में नई बहस शुरू हो गई है। सरकार ने कहा है कि भारतीय पासपोर्ट मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज है और यह नागरिकता का पक्का प्रमाण नहीं है। इसी बयान पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सवाल उठाते हुए इसे “कानूनी विरोधाभास” बताया है।
शशि थरूर ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लंबी पोस्ट में कहा कि ‘पासपोर्ट सेवा दिवस’ पर आए इस बयान ने आम लोगों में भ्रम पैदा किया है। उन्होंने कहा कि दशकों से पासपोर्ट को सबसे मजबूत पहचान दस्तावेज माना जाता रहा है, जिसे पुलिस वेरिफिकेशन और सख्त जांच के बाद जारी किया जाता है।
थरूर ने सवाल किया कि जब इतना मजबूत दस्तावेज नागरिकता का प्रमाण नहीं है, तो फिर कौन सा दस्तावेज होगा? उनके अनुसार यह स्थिति आम नागरिकों के लिए प्रशासनिक असमंजस पैदा करती है।
आधार और पासपोर्ट पर कानूनी स्थिति का जिक्र
थरूर ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि आधार कार्ड सिर्फ पहचान और निवास का प्रमाण है, नागरिकता का नहीं। ऐसे में लाखों लोग ऐसे दस्तावेजों के बीच उलझे हुए हैं जिन्हें राष्ट्रीयता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जाता।
थरूर का सुझाव और सरकार का पक्ष
थरूर ने सुझाव दिया कि पासपोर्ट और आधार दोनों को नागरिकता का वैध प्रमाण माना जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने UIDAI द्वारा गैर-नागरिकों के लिए अलग रंग के आधार कार्ड की व्यवस्था का प्रस्ताव भी रखा। दूसरी ओर सरकार का कहना है कि ‘पासपोर्ट अधिनियम 1967’ के अनुसार पासपोर्ट नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं है और कुछ मामलों में गैर-नागरिकों को भी पासपोर्ट जारी किया जा सकता है।

