केतन अग्रवाल हत्याकांड: फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलेगा मुकदमा, मुख्यमंत्री फडणवीस का बड़ा फैसला
Sandesh Wahak Digital Desk: महाराष्ट्र के लोनावला ग्रामीण क्षेत्र में हुए चर्चित रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल हत्याकांड में न्याय की प्रक्रिया तेज हो गई है। मृतक के पिता विशाल अग्रवाल ने आज पुणे में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात कर अपने बेटे के लिए न्याय की गुहार लगाई। मुख्यमंत्री फडणवीस ने परिवार को ढांढस बंधाते हुए आश्वस्त किया कि इस जघन्य अपराध के दोषियों को कानून के दायरे में लाकर कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाएगी।
मुलाकात के दौरान विशाल अग्रवाल ने सरकार के सामने दो प्रमुख मांगें रखीं- पहला, मामले की त्वरित सुनवाई के लिए इसे फास्ट ट्रैक कोर्ट में भेजा जाए और दूसरा, देश के दिग्गज विधिवेत्ता अधिवक्ता उज्ज्वल निकम को विशेष सरकारी वकील नियुक्त किया जाए।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए दोनों ही मांगों को तत्काल मंजूरी दे दी और विधि एवं न्याय विभाग के सचिव को इस संबंध में आवश्यक कदम उठाने के कड़े निर्देश जारी किए। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, वरिष्ठ अधिवक्ता उज्ज्वल निकम ने भी इस हाई-प्रोफाइल हत्याकांड में सरकार की ओर से पैरवी करने और विशेष सरकारी वकील की जिम्मेदारी संभालने के लिए अपनी आधिकारिक सहमति दे दी है।
लोहागढ़ किले से गिराकर हत्या का शक
गौरतलब है कि रियल एस्टेट क्षेत्र के उभरते कारोबारी केतन अग्रवाल की मौत बीते 18 जून को पुणे के पास स्थित ऐतिहासिक लोहागढ़ किले की गहरी खाई में गिरने से हुई थी। शुरुआती जांच के बाद लोनावला ग्रामीण पुलिस ने इसे हत्या का मामला मानते हुए जांच तेज कर दी है। पुलिस को शक है कि इस हत्याकांड के पीछे मुख्य आरोपी सिया गोयल का हाथ है। तफ्तीश के मुताबिक, सिया गोयल फिलहाल अपनी जिंदगी के इस पड़ाव पर शादी करने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं थी, जबकि केतन से शादी को लेकर उसके परिवार की तरफ से उस पर लगातार भारी दबाव बनाया जा रहा था। इसी हताशा और विवाद में इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिए जाने की आशंका है।
संपन्न और शिक्षित परिवारों के बच्चों में ऐसी क्रूरता क्यों: देवेंद्र फडणवीस
इस दिल दहला देने वाली घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने समाज और आधुनिक परवरिश पर गंभीर सवाल उठाए। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा, यह एक ऐसी चौंकाने वाली और अकल्पनीय घटना है, जो हमें एक समाज के रूप में आत्ममंथन करने पर मजबूर करती है। हमें सोचना होगा कि आखिर क्यों आज के पढ़े-लिखे, आधुनिक और संपन्न परिवारों के बच्चे इतनी विनाशकारी, द्वेषपूर्ण और क्रूर सोच विकसित कर रहे हैं? इस खतरनाक मानसिकता की जड़ें कहां हैं? नागरिकों को इसे सिर्फ एक आपराधिक घटना के तौर पर नहीं, बल्कि एक गंभीर सामाजिक चुनौती के रूप में देखना चाहिए।
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