भारत-पाक बातचीत की अपील पर सियासी घमासान, फारूक, महबूबा और अय्यर समेत कई दिग्गजों के हस्ताक्षर से भड़की भाजपा

Sandesh Wahak Digital Desk: सीमा पार से जारी आतंकवाद और दोनों देशों के बीच बने तनाव के बीच, भारत और पाकिस्तान के बीच राजनयिक संबंध दोबारा बहाल करने की मांग को लेकर एक नए राजनीतिक विवाद ने तूल पकड़ लिया है। दरअसल, देश के कई प्रमुख राजनेताओं और जानी-मानी हस्तियों ने एक खुले पत्र पर हस्ताक्षर कर दोनों देशों से बातचीत की मेज पर लौटने की अपील की है। ‘सेंटर फॉर पीस एंड प्रोग्रेस’ की तरफ से जारी यह संयुक्त पत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ को संबोधित है।

इस पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में नेशनल कॉन्फ्रेंस के संरक्षक फारूक अब्दुल्ला, पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती, राजद सांसद प्रो. मनोज झा, मणिशंकर अय्यर, जवाहर सरकार, मोहम्मद यूसुफ तारिगामी, अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फारूक और रॉ (RAW) के पूर्व चीफ ए.एस. दुलत समेत कई बड़े नाम शामिल हैं। 30 जून को लिखे गए इस पत्र में कहा गया है कि दोनों देशों के बीच जारी गतिरोध के कारण लाखों युवाओं का भविष्य और आर्थिक अवसर प्रभावित हो रहे हैं। वैश्विक आबादी का एक बड़ा हिस्सा इस क्षेत्र में रहता है, इसलिए यहां का भविष्य टकराव के बजाय विकास और कनेक्टिविटी से तय होना चाहिए।

व्यापारिक रास्ते खोलने समेत ये हैं प्रमुख मांगें

खुले पत्र में दोनों सरकारों से दक्षिण एशिया में अमन-चैन के लिए तुरंत कदम उठाने की मांग करते हुए कई अहम बिंदु रखे गए हैं।

नई दिल्ली और इस्लामाबाद में उच्चायुक्तों की फिर से तैनाती और पूर्ण राजनयिक संबंधों की बहाली।

आम जनता के लिए सामान्य वीजा सेवाओं की दोबारा शुरुआत।

जम्मू-कश्मीर सहित सभी लंबित द्विपक्षीय मुद्दों पर व्यापक चर्चा और 2004-2007 के कश्मीर समझौते की समीक्षा।

सुरक्षा चिंताओं को ध्यान में रखकर दोनों तरफ से विसैन्यीकरण (तनाव कम करना)।

व्यापार और आवाजाही के लिए अटारी-वाघा बॉर्डर और श्रीनगर-मुजफ्फरबाद बस सेवा को फिर से चालू करना।

हवाई क्षेत्र (Commercial Flights) और करतारपुर साहिब कॉरिडोर को खोलना।

पाकिस्तान की नीलम घाटी में मौजूद ऐतिहासिक शारदा पीठ समेत अन्य धार्मिक व सांस्कृतिक स्थलों तक श्रद्धालुओं की पहुंच सुगम बनाना।

भाजपा बोली- यह शहीदों और सेना का अपमान

अपनी इस अपील का बचाव करते हुए अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फारूक ने तर्क दिया कि जब बड़े टकरावों के बाद अमेरिका और ईरान जैसे देश बातचीत की मेज पर लौट सकते हैं, तो भारत-पाकिस्तान क्यों नहीं? उन्होंने कहा कि युद्ध कभी विवादों का स्थायी हल नहीं हो सकते।

दूसरी तरफ, भारतीय जनता पार्टी ने इस पत्र को लेकर हस्ताक्षरकर्ताओं पर बेहद तीखा हमला बोला है। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने इस कदम की टाइमिंग पर सवाल उठाते हुए हस्ताक्षर करने वाले नेताओं को आतंकवाद का समर्थक तक करार दे दिया। पूनावाला ने कहा कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत की नीति आतंकवाद के खिलाफ बेहद सख्त है।

ऑपरेशन सिंदूर और सिंधु जल संधि पर कड़े फैसलों का हवाला देते हुए उन्होंने साफ किया कि नया भारत आतंकवादियों और उनके मददगारों में कोई फर्क नहीं करता। उन्होंने आरोप लगाया कि सेना के पराक्रम पर सवाल उठाने वाले ये नेता पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के पीड़ितों के साथ खड़े होने के बजाय इस्लामाबाद की पैरवी कर रहे हैं, जो देश के शहीदों का सीधा अपमान है।

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