खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होंगे आचार्य लोकेश मुनि, ईरान सरकार ने भेजा राजकीय न्योता
Sandesh Wahak Digital Desk: जैन संत और अहिंसा विश्व भारती के संस्थापक आचार्य लोकेश मुनि ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार में हिस्सा लेंगे। ईरान सरकार की तरफ से मिले इस औपचारिक निमंत्रण को उन्होंने स्वीकार कर लिया है। तेहरान में 4 और 5 जुलाई को होने वाले इस मुख्य कार्यक्रम में दुनिया भर के राष्ट्राध्यक्ष और वैश्विक नेता शामिल हो रहे हैं।
जैन मुनि के आधिकारिक ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर निमंत्रण पत्र की तस्वीर साझा करते हुए बताया गया कि वे इस समय अमेरिका के दौरे पर हैं और ईरान सरकार के विशेष बुलावे पर सीधे वहीं से तेहरान पहुंचेंगे। अमेरिका में उनके वी सपोर्ट पीस अभियान को रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों ही दलों के राजनेताओं का भारी समर्थन मिला है, जिसके बाद उनकी यह ईरान यात्रा वैश्विक शांति के प्रयासों के लिए एक बड़ा मील का पत्थर मानी जा रही है। वहीं, ईरानी सर्वोच्च नेता के कार्यालय द्वारा भेजे गए पत्र में कहा गया है कि आचार्य लोकेश मुनि की मौजूदगी भारत और ईरान के ऐतिहासिक व गहरे दोस्ताना रिश्तों का प्रतीक बनेगी।
सुपुर्द-ए-खाक करने के लिए बनाया गया ये खास शेड्यूल
ईरान की सरकारी मीडिया एजेंसी आईआरएनए के अनुसार, इस ऐतिहासिक अंतिम संस्कार में करीब 1.2 करोड़ से 2 करोड़ लोगों के जुटने की संभावना है। इतनी विशाल भीड़ को देखते हुए तेहरान में सुरक्षा व्यवस्था, आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं और यातायात को लेकर बेहद कड़े और विशेष इंतजाम किए गए हैं। इस दौरान तेहरान के कई प्रमुख मार्गों पर आम वाहनों की आवाजाही पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी।
इस राजकीय अंतिम संस्कार में भारत सरकार का प्रतिनिधित्व करने के लिए बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैय्यद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा तेहरान जाएंगे।
मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किए जाएंगे खामेनेई
करीब 36 वर्षों तक इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के सर्वोच्च नेता के पद पर रहे अयातुल्ला अली खामेनेई की जान 28 फरवरी को तेहरान पर हुए यूएस-इजरायल हवाई हमले के पहले ही दिन चली गई थी। उन्होंने दशकों तक ईरान की सियासत और धार्मिक व्यवस्था की कमान संभाली थी।
ईरानी मीडिया के मुताबिक, अंतिम संस्कार के कार्यक्रमों की रूपरेखा बेहद भव्य रखी गई है। मुख्य आयोजनों के बाद 7 जुलाई को पवित्र शहर कॉम में विशेष धार्मिक सभाएं होंगी। इसके बाद, आगामी 9 जुलाई को उनके जन्मस्थान मशहद में उन्हें पूरे राजकीय सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-खाक (दफनाया) किया जाएगा।
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