मैक आईडी क्लोन कर अवैध तरीके से पहचान पत्र बनाने वाले गिरोह का मास्टरमाइंड गिरफ्तार

Kasganj News: उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (UP STF) ने तकनीकी सुरक्षा तंत्र में सेंध लगाकर अवैध तरीके से पहचान पत्र (आधार कार्ड) बनाने वाले एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है। एसटीएफ मुख्यालय की साइबर टीम ने इस रैकेट के मास्टरमाइंड मोहम्मद अकील सैफी को कासगंज जनपद के थाना सहावर क्षेत्र से गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता हासिल की है। आरोपी वैध ऑपरेटरों के अधिकृत कंप्यूटर प्रणालियों की मैक (MAC) आईडी क्लोन कर इस अवैध नेटवर्क को संचालित कर रहा था।

एसटीएफ की टीम ने मंगलवार रात करीब 9:15 बजे ग्राम कनोई में घेराबंदी कर 29 वर्षीय अकील सैफी को दबोचा। आरोपी के पास से 2 लैपटॉप, 1 टैब, 3 मोबाइल फोन, 1 वाईफाई राउटर, 1 वेबकैम, 1 प्रिंटर, एक लक्जरी कार और अवैध गतिविधियों से जुड़े स्क्रीनशॉट की 57 कॉपियां बरामद की गई हैं। इस गिरोह का सुराग साल 2025 में बहराइच के मुर्तिहा थाने में दर्ज एक जालसाजी के मामले से मिला था, जिसकी कड़ियां जोड़ते हुए एसटीएफ मुख्य आरोपी तक पहुंची।

ऐसे खुला फर्जीवाड़े का पूरा तंत्र

इंटरमीडिएट पास अकील सैफी तकनीक का जानकार है। पूछताछ में उसने बताया कि साल 2015 में उसने संबंधित तकनीकी परीक्षा पास की थी और एक निजी कंपनी के जरिए ऑपरेटर के तौर पर काम शुरू किया था। साल 2021 में हरियाणा के फरीदाबाद में तैनाती के दौरान उसकी मुलाकात योगेश नामक व्यक्ति से हुई। योगेश ने ही उसे अधिकृत प्रणालियों की मैक आईडी क्लोन करना और कंप्यूटर के मूल इनपुट सिस्टम (BIOS) में बदलाव करना सिखाया था। यही नहीं, उसने ऑपरेटर के फिंगरप्रिंट का स्क्रीनशॉट लेकर उसे कोड में बदलकर सिस्टम में अवैध लॉगिन करने की कोडिंग भी सीखी थी।

यह तकनीक सीखने के बाद उसने नौकरी छोड़ दी और सोशल मीडिया के जरिए उन ऑपरेटरों से संपर्क साधा जो अपनी आईडी कमीशन पर दूसरों को देना चाहते थे। अकील अपने भांजे शोएब की मदद से ‘टीम व्यूअर’ और एनी डेस्क जैसे रिमोट एक्सेस सॉफ्टवेयर के जरिए दूसरों के कंप्यूटर का मैक एड्रेस बदल देता था। साल 2025 में उसने फर्जी जन्म और निवास प्रमाण पत्र बनाने का सोर्स कोड भी हासिल कर लिया, जिससे उसके वेंडर आसानी से जाली दस्तावेज तैयार कर लेते थे।

योनो कैश से होता था पैसों का लेनदेन

आरोपी ने खुलासा किया कि वह इस अवैध काम के लिए प्रति कार्ड 600 रुपये का कमीशन लेता था। इस रकम में से 300 रुपये वह खुद रखता था और बाकी के 300 रुपये उस वैध आईडी के असली ऑपरेटर को दे दिए जाते थे। पकड़े जाने से बचने के लिए वह पैसों के लेनदेन में बैंक खातों के बजाय एसबीआई योनो कैश (बिना कार्ड के पैसे निकालने की सुविधा) का इस्तेमाल करता था।

एसटीएफ अब आरोपी के बैंक खातों, डिजिटल वॉलेट और इस गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है। बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा जा रहा है। आरोपी के खिलाफ कासगंज के सहावर थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS), आईटी एक्ट और आधार अधिनियम की प्रासंगिक धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

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