एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित बने नए उप वायुसेनाध्यक्ष, संभाला कार्यभार

Sandesh Wahak Digital Desk: भारतीय वायुसेना (IAF) के शीर्ष नेतृत्व में एक महत्वपूर्ण बदलाव के तहत एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने 1 जुलाई को आधिकारिक रूप से वाइस चीफ ऑफ द एयर स्टाफ (उप वायुसेनाध्यक्ष) का पदभार संभाल लिया है। एयर मार्शल दीक्षित कारगिल युद्ध के ऐतिहासिक ऑपरेशन सफेद सागर और हाल ही में अंजाम दिए गए ऑपरेशन सिंदूर में अपनी रणनीतिक भूमिका के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने एयर मार्शल नागेश कपूर का स्थान लिया है, जो 30 जून 2026 को करीब 40 वर्षों की देश सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए।

6 दिसंबर, 1986 को वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन पाने वाले एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित देश के सबसे अनुभवी लड़ाकू पायलटों में गिने जाते हैं। वे राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA), बांग्लादेश के डिफेंस स्टाफ सर्विस कॉलेज और नेशनल डिफेंस कॉलेज के छात्र रहे हैं। उनके पास विभिन्न प्रकार के सैन्य और लड़ाकू विमानों को उड़ाने का 3,500 घंटे से अधिक का व्यापक अनुभव है।

तेजस और मिराज समेत कई फाइटर प्लेन उड़ाने का अनुभव

वायुसेना के वाइस चीफ की कमान संभालने से पहले वे सेंट्रल एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के रूप में कार्यरत थे। इसके अलावा उन्होंने चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ के तौर पर तीनों सेनाओं (थल, नभ और जल) के बीच आपसी समन्वय और संयुक्तता को मजबूत करने के लिए कई अहम कदम उठाए।

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, एयर मार्शल दीक्षित एक एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट और योग्य उड़ान प्रशिक्षक (फ्लाइट इंस्ट्रक्टर) भी हैं। उन्होंने मिराज-2000, मिग सीरीज के लड़ाकू विमान, जगुआर, तेजस, आईएल-78, हॉक और एएन-32 जैसे कई विमानों का सफलतापूर्वक संचालन किया है। अपने करियर के दौरान वे ऑपरेशन रक्षक और कोप इंडिया जैसे प्रमुख अभियानों का भी हिस्सा रहे हैं। उन्होंने नंबर 9 स्क्वाड्रन की कमान संभालते हुए उसे मिराज-2000 विमानों से लैस करने में मुख्य भूमिका निभाई थी।

देश की रक्षा क्षमता को दी नई दिशा

एयर मार्शल दीक्षित ने वायु मुख्यालय में डिप्टी चीफ ऑफ एयर स्टाफ, दक्षिणी वायु कमान में एयर डिफेंस कमांडर और सहायक वायु स्टाफ प्रमुख (प्लान्स व प्रोजेक्ट्स) जैसे कई नीतिगत पदों पर अपनी सेवाएं दी हैं। उनके नेतृत्व में तीनों सेनाओं के लिए कई संयुक्त सैन्य सिद्धांत तैयार किए गए, जिनका उद्देश्य देश की सुरक्षा प्रणाली को अभेद्य बनाना था।

देश के प्रति उनकी असाधारण और उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें कई बार प्रतिष्ठित सैन्य सम्मानों से नवाजा जा चुका है। उन्हें साल 2006 में वायु सेना पदक, 2011 में विशिष्ट सेवा पदक, 2023 में अति विशिष्ट सेवा पदक और इसी वर्ष यानी 2026 में देश के उच्च सैन्य सम्मान परम विशिष्ट सेवा पदक (PVSM) से सम्मानित किया गया है। वायुसेना के नए उप प्रमुख के तौर पर उनकी यह नियुक्ति भारतीय सैन्य तैयारियों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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