हार्दिक पंड्या की भूमिका निभाने का दबाव? नीतीश रेड्डी की चोट के बाद BCCI CoE पर उठे सवाल
Sports News: इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज में हार के बाद भारतीय क्रिकेट टीम की फिटनेस को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
टीम के कप्तान शुभमन गिल ने भी खिलाड़ियों की फिटनेस पर चिंता जताई थी। इसी बीच एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि खिलाड़ियों की लगातार चोटों, विशेषकर हैमस्ट्रिंग इंजरी, और वर्कलोड मैनेजमेंट को लेकर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है।
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले कुछ समय में भारतीय खिलाड़ियों के बार-बार चोटिल होने के मामलों ने फिटनेस प्रबंधन को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
दावा किया गया है कि सपोर्ट स्टाफ में बदलाव के बाद कुछ वरिष्ठ खिलाड़ियों को नए सिस्टम के साथ तालमेल बैठाने में कठिनाई हुई, जिससे टीम मैनेजमेंट और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के बीच समन्वय को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
हैमस्ट्रिंग इंजरी के बढ़ते मामलों पर चिंता
रिपोर्ट में कहा गया है कि हाल के महीनों में हैमस्ट्रिंग की चोटों के कई मामले सामने आए हैं।
रिपोर्ट में शामिल एक सूत्र के हवाले से दावा किया गया है कि कुछ खिलाड़ियों को पूरी तरह फिट हुए बिना मैदान पर उतारा गया। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
सूत्र के अनुसार, खिलाड़ियों की फिटनेस और वर्कलोड मैनेजमेंट को लेकर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और टीम मैनेजमेंट के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

मेडिकल स्टाफ में नियुक्ति का भी जिक्र
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि नितिन पटेल के पद छोड़ने के बाद अब तक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में हेड ऑफ मेडिकल स्टाफ की नियुक्ति नहीं की गई है।
साथ ही, वर्ष 2023 में तैयार किए गए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर्स (SOPs) में भी अब तक कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, खिलाड़ियों की फिटनेस से जुड़ा डेटा पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित रूप से एकत्र किया जा रहा है, लेकिन उस डेटा के आधार पर समय पर निर्णय लेने की प्रक्रिया अपेक्षाकृत धीमी बताई गई है।
नीतीश कुमार रेड्डी का मामला भी चर्चा में
रिपोर्ट में ऑलराउंडर नीतीश कुमार रेड्डी का भी उल्लेख किया गया है। दावा किया गया है कि टीम संतुलन बनाए रखने और ऑलराउंडर हार्दिक पंड्या जैसी भूमिका निभाने की अपेक्षाओं के कारण उन पर अतिरिक्त दबाव था।
हालांकि, रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि उनकी चोट का सीधा संबंध इसी दबाव से था।
BCCI की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं
फिलहाल, रिपोर्ट में किए गए दावों पर BCCI की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
ऐसे में खिलाड़ियों की फिटनेस, चोट प्रबंधन और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहे सवालों पर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर क्रिकेट जगत की नजर बनी हुई है।

