कोडीन सिरप के बाद अब ‘ब्लू कैप्सूल’ का नशा, Lucknow में 5 लाख रुपए की नशीली दवाएं जब्त
Blue Capsule Drugs: लखनऊ (Lucknow) में करोड़ों रुपये के कोडीन सिरप (Codeine Syrup) रैकेट के खुलासे के बाद अब नशे का एक नया चेहरा सामने आया है। इस बार युवाओं के बीच तेजी से ऐसे ‘नीले कैप्सूल (Blue Capsules)’ का चलन बढ़ने की बात सामने आई है, जिनका इस्तेमाल मूल रूप से गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए किया जाता है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) की हालिया कार्रवाई में करीब 5 लाख रुपये कीमत के ऐसे कैप्सूल बरामद हुए हैं, जिनके दुरुपयोग ने जांच एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।
प्राथमिक जांच में सामने आया है कि जिन दवाओं का उपयोग डॉक्टर नसों के दर्द, मिर्गी (Epilepsy) और गंभीर दर्द के इलाज में करते हैं, वही अब नशे के कारोबार का हिस्सा बनती जा रही हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि नियंत्रित श्रेणी की ये दवाएं आखिर बिना वैध प्रिस्क्रिप्शन के युवाओं तक कैसे पहुंच रही हैं।
दवा कारोबार से जुड़े लोग भी सप्लाई को लेकर हैरान
दवा कारोबार से जुड़े कई लोगों का कहना है कि स्पाजमो प्रॉक्सीवान (Spasmo Proxyvon) जैसी दवा वर्षों पहले सामान्य बाजार से लगभग गायब हो चुकी थी। हालांकि हाल के दिनों में अलग-अलग माध्यमों से इसकी सप्लाई होने की चर्चाएं लगातार बढ़ी हैं। हालिया छापेमारी में जिन स्थानों से बड़ी मात्रा में नशीले कैप्सूल मिले हैं, उसने दवा कारोबारियों को भी चौंका दिया है।
अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि आखिर प्रतिबंधित या नियंत्रित दवाएं किन चैनलों के जरिए मेडिकल स्टोरों और स्थानीय सप्लायरों तक पहुंच रही हैं।
वरिष्ठ चिकित्सकों का कहना है कि इन दवाओं का दुरुपयोग लगातार बढ़ने के कारण अधिकांश डॉक्टर अब इन्हें लिखने से बचते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक यदि इसके बावजूद ये दवाएं खुले बाजार में आसानी से उपलब्ध हैं तो यह गंभीर नियामकीय चूक का संकेत है। ऐसे मामलों में यह जांच जरूरी है कि बिना डॉक्टर की पर्ची के आखिर किन दुकानों से इनकी बिक्री हो रही है।
FSDA की कार्रवाई, पूरे नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश
लखनऊ (Lucknow) मंडल के FSDA अधिकारियों के अनुसार पिछले 15 दिनों के दौरान चलाए गए अभियान में करीब 5 लाख रुपये कीमत के नशीले कैप्सूल बरामद किए गए हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि इनकी सप्लाई फुटकर स्तर पर ही नहीं, बल्कि शहर के बाहर से भी की जा रही थी।
अधिकारियों का कहना है कि कार्रवाई केवल दवाएं जब्त करने तक सीमित नहीं रहेगी। जांच अब पूरे सप्लाई नेटवर्क, इसमें शामिल लोगों और संभावित रैकेट तक पहुंचने पर केंद्रित है। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़ी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
इन दवाओं में मुख्य रूप से स्पाजमो प्रॉक्सीवान (Spasmo Proxyvon), प्रिगाबालिन (Pregabalin), गैबापेंटिन (Gabapentin) और ट्रामाडोल (Tramadol) शामिल हैं। इनका उपयोग डॉक्टर अलग-अलग चिकित्सकीय स्थितियों में करते हैं, लेकिन जरूरत से अधिक मात्रा या गलत तरीके से सेवन करने पर इनमें नशे की लत विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है।
यही वजह है कि युवाओं के बीच इन दवाओं की मांग तेजी से बढ़ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि इनमें शराब जैसी गंध नहीं होती, इन्हें जेब या बैग में आसानी से रखा जा सकता है, कीमत भी अपेक्षाकृत कम होती है और कई जगह बिना वैध प्रिस्क्रिप्शन के उपलब्ध होने की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। यही कारण है कि परिवार और पुलिस की नजर से बचकर इनका दुरुपयोग करना आसान माना जा रहा है।
सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (CDSCO) के नियमों के मुताबिक ऐसी कई नियंत्रित दवाओं की बिक्री केवल वैध डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन पर ही की जा सकती है। इसके बावजूद बिना पर्ची इनकी बिक्री के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं, जिसने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि इन दवाओं का नशे के रूप में सेवन करने से मस्तिष्क, लीवर और किडनी पर गंभीर असर पड़ सकता है। लंबे समय तक इस्तेमाल लत का कारण बन सकता है, जबकि ओवरडोज की स्थिति में सांस रुकने जैसी गंभीर समस्या और मौत तक का खतरा पैदा हो सकता है।
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