इंदिरा का नाती बड़ा उत्पाती, अनुराग ठाकुर ने राहुल गांधी के बहाने कांग्रेस पर बोला तीखा हमला
Sandesh Wahak Digital Desk: संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक हलचल तेज है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और सांसद अनुराग ठाकुर ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर अब तक का सबसे तीखा प्रहार किया है। राहुल गांधी को सबसे बड़ा उत्पाती करार देते हुए अनुराग ठाकुर ने आरोप लगाया कि वे देश के छात्रों के गुस्से का इस्तेमाल अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने के लिए कर रहे हैं।
अनुराग ठाकुर का कांग्रेस के इतिहास पर तंज
एक समाचार एजेंसी से बातचीत के दौरान अनुराग ठाकुर ने कांग्रेस के अतीत को कुरेदते हुए कहा कि आपातकाल के दौरान इंदिरा गांधी की सरकार ने 100,000 से अधिक निर्दोष छात्रों को जेलों में ठूंस दिया था। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, जो खुद भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों में जमानत पर घूम रहे हैं, वे युवाओं के हित की बात कैसे कर सकते हैं?
कांग्रेस शासनकाल में 100 से अधिक प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक हुए। अकेले राजस्थान में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के वक्त 17 बार पेपर लीक की घटनाएं हुईं और उस समय के शिक्षा मंत्री को पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाकर सम्मानित किया गया। अनुराग ठाकुर ने दावा किया कि संसद में 9 घंटे चली बहस के दौरान कांग्रेस नेताओं ने विधेयक पर 9 शब्द भी नहीं बोले, क्योंकि वे जानते हैं कि जांच में पेपर माफियाओं के साथ उनके पुराने कनेक्शन उजागर हो जाएंगे।
"इंदिरा के नाती, राहुल गांधी सबसे बड़े उत्पाती… अरे भई अपना इतिहास तो देखो, 1 लाख छात्रों को इमरजेंसी के वक्त जेलों में डाला…"- अनुराग ठाकुर pic.twitter.com/o06GEgBQls
— Akshay Pratap Singh (@AkshayPratap94) July 29, 2026
केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले का पलटवार
दूसरी ओर, केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास आठवले ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी पर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा द्वारा लगाए गए आरोपों को मनगढ़ंत और बेबुनियाद बताया। आठवले ने कहा कि प्रह्लाद जोशी लंबे समय से कर्नाटक की राजनीति में बेदाग छवि वाले नेता रहे हैं और उन्होंने संगठन व केंद्र सरकार दोनों में अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया है। आठवले ने राहुल गांधी पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि दिल्ली में छात्रों के प्रति सहानभूति जताने वाले राहुल को केरल की ओर देखना चाहिए, जहां उनकी सहयोगी व्यवस्था में छात्रों पर कठोर कार्रवाइयां की जाती हैं।
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