विश्व स्तनपान सप्ताह: UP में केवल 34.6% बच्चों को मिल पा रहा माँ का दूध, बाल रोग विशेषज्ञों ने जताई चिंता
Kanpur News: विश्व स्तनपान सप्ताह (1–7 अगस्त 2026) के उपलक्ष्य में एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स, कानपुर की ओर से जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग में एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। इस दौरान अध्यक्ष डॉ. जेके गुप्ता, सचिव डॉ. शैलेन्द्र गौतम, प्रो. डॉ. अरुण आर्य और डॉ. अमितेश यादव ने संयुक्त रूप से पत्रकारों को संबोधित किया। विशेषज्ञों ने वर्ष 2026 की थीम “Breastfeeding for a Sustainable Start in Life: Strengthen What Works” का उल्लेख करते हुए नवजात शिशुओं को माँ के दूध से मिलने वाले सुरक्षा चक्र पर विस्तार से प्रकाश डाला।
मां का पहला पीला दूध शिशु की पहली संजीवनी
डॉ. जेके गुप्ता ने बताया कि प्रसव के तुरंत बाद निकलने वाला माँ का पहला गाढ़ा पीला दूध (कोलोस्ट्रम) बच्चे के लिए पहला टीका (First Immunization) होता है, जो नवजात को गंभीर संक्रमणों से बचाता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान शुरू कराना, शुरुआती छह महीनों तक सिर्फ माँ का दूध देना और उसके बाद दो वर्ष तक पूरक आहार के साथ स्तनपान जारी रखना हर परिवार की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।
उत्तर प्रदेश के आंकड़े बेहद चिंताजनक
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) के आंकड़ों का हवाला देते हुए विशेषज्ञों ने बताया कि भारत में जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान शुरू कराने की दर बढ़कर 50.1% हुई है। हालांकि, छह महीने तक केवल स्तनपान कराने की राष्ट्रीय दर घटकर 55.8% पर आ गई है। सबसे चौकाने वाले और चिंताजनक आंकड़े उत्तर प्रदेश के हैं, जहाँ यह दर 59.7% से गिरकर मात्र 34.6% रह गई है। इसका सीधा मतलब है कि प्रदेश के लगभग दो-तिहाई नवजात जीवन के शुरुआती छह महीनों में माँ के दूध से वंचित रह जाते हैं।
शहद, घुट्टी और बोतल का दूध बच्चों के लिए खतरनाक
प्रेस वार्ता के दौरान डॉक्टरों ने आगाह किया कि नवजात को शहद, घुट्टी, गाय-भैंस का दूध या बोतल से दूध पिलाना बेहद नुकसानदेह है। इससे संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। बोतलों की सही सफाई न होने से बैक्टीरिया पनपते हैं जो निमोनिया, दस्त, सेप्सिस और कान के संक्रमण का कारण बनते हैं। केवल माँ का दूध बच्चे के दिमाग के बेहतर विकास (IQ) के साथ-साथ अचानक शिशु मृत्यु सिंड्रोम के खतरे को 50% तक कम करता है और भविष्य में ल्यूकेमिया (ब्लड कैंसर) जैसी बीमारियों से भी सुरक्षा प्रदान करता है।
1 से 7 अगस्त तक चलेगा वृहद जागरूकता अभियान
भारतीय शिशु अकादमी (IAP) स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के माँ कार्यक्रम के तहत लगातार काम कर रही है। विश्व स्तनपान सप्ताह के अंतर्गत 1 से 7 अगस्त तक कानपुर के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों, स्कूलों, महिला मंडलों और सामुदायिक केंद्रों पर सेमिनार, परामर्श शिविर और जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। अंत में संस्था ने समाज, मीडिया और स्वास्थ्यकर्मियों से स्तनपान को एक जन-आंदोलन बनाने की अपील की।
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