कौन हैं रुमेश थरंगा पथिरागे? क्रिकेट छोड़ जैवलिन में आए, नीरज चोपड़ा को हराकर बने CWG चैंपियन
Sports News: श्रीलंका के 23 वर्षीय जैवलिन थ्रोअर रुमेश थरंगा पथिरागे ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में 89.75 मीटर का थ्रो कर गोल्ड मेडल जीत लिया।
उन्होंने नीरज चोपड़ा समेत दुनिया के कई दिग्गज खिलाड़ियों को पीछे छोड़कर इतिहास रच दिया।
ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पुरुष जैवलिन थ्रो का फाइनल मुकाबला भारतीय फैंस के लिए बेहद रोमांचक रहा।
शुक्रवार (31 जुलाई) को हुए इस मुकाबले में श्रीलंका के युवा खिलाड़ी रुमेश थरंगा पथिरागे ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया।
23 वर्षीय रुमेश ने फाइनल में 89.75 मीटर का थ्रो किया और गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया। वहीं भारत के स्टार जैवलिन थ्रोअर और दो बार के ओलंपिक पदक विजेता नीरज चोपड़ा 85.83 मीटर के थ्रो के साथ सिल्वर मेडल जीत सके।
भारत के ही यशवीर सिंह ने 85.41 मीटर के व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के साथ ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया।
खास बात यह रही कि रुमेश का फाइनल में सिर्फ एक ही थ्रो वैध रहा, लेकिन वही थ्रो उन्हें चैंपियन बनाने के लिए काफी साबित हुआ।
नीरज चोपड़ा समेत कई दिग्गजों को छोड़ा पीछे
रुमेश थरंगा पथिरागे की यह जीत इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने जैवलिन थ्रो की दुनिया के कई बड़े नामों को पीछे छोड़ा।
उन्होंने नीरज चोपड़ा के अलावा मौजूदा ओलंपिक चैंपियन अरशद नदीम, वर्ल्ड चैंपियन केशोर्न वाल्कॉट और पूर्व विश्व चैंपियन एंडरसन पीटर्स जैसे खिलाड़ियों को मात दी।

यह रुमेश के करियर का पहला बड़ा अंतरराष्ट्रीय गोल्ड मेडल है। हालांकि, उनके प्रदर्शन को बड़ा उलटफेर नहीं माना जा सकता, क्योंकि साल 2026 में वह लगातार शानदार फॉर्म में चल रहे थे।
92.62 मीटर थ्रो से दुनिया में बनाई पहचान
रुमेश थरंगा पथिरागे ने मई 2026 में रोम डायमंड लीग में शानदार प्रदर्शन करते हुए 92.62 मीटर का थ्रो किया था। वह इस सीजन में 90 मीटर का आंकड़ा पार करने वाले दुनिया के पहले जैवलिन थ्रोअर बने थे।
उनके इस प्रदर्शन के बाद ही उन्हें कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल का सबसे बड़ा दावेदार माना जा रहा था और उन्होंने उम्मीदों पर खरा उतरते हुए इतिहास रच दिया।
फाइनल से पहले नीरज चोपड़ा ने भी रुमेश की तारीफ की थी। नीरज ने कहा था कि वह शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं और श्रीलंका के लिए उनका अच्छा करना खुशी की बात है।
क्रिकेट छोड़ जैवलिन को बनाया करियर
रुमेश थरंगा पथिरागे की सफलता की कहानी काफी दिलचस्प है। बहुत कम लोग जानते हैं कि वह पहले क्रिकेट खेलते थे और एक तेज गेंदबाज थे।
अंडर-18 क्रिकेट के दौरान उनकी गेंदबाजी की रफ्तार 134 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच चुकी थी। उस समय वह श्रीलंका के तेज गेंदबाज ईशान मलिंगा के बाद सबसे तेज गेंद फेंकने वाले युवा गेंदबाजों में शामिल थे।
लेकिन कोच टोनी प्रसन्ना की सलाह के बाद उन्होंने क्रिकेट छोड़कर जैवलिन थ्रो को अपना करियर बना लिया।
रुमेश के मुताबिक, कोच टोनी ने उन्हें सिर्फ खेल की तकनीक ही नहीं सिखाई, बल्कि जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा भी दी।
2025 विश्व चैंपियनशिप में सातवें स्थान पर रहने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार मेहनत करते हुए 2026 में दुनिया के शीर्ष जैवलिन थ्रोअर में अपनी जगह बना ली।
IOC की स्कॉलरशिप से मिली मदद
रुमेश थरंगा पथिरागे की सफलता में इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी (IOC) की ओलंपिक सॉलिडेरिटी स्कॉलरशिप का भी अहम योगदान रहा है।
इस योजना के तहत खिलाड़ियों को आर्थिक सहायता दी जाती है, जिससे वे ट्रेनिंग, उपकरण, यात्रा और ओलंपिक क्वालिफिकेशन प्रतियोगिताओं की तैयारी कर सकें। रुमेश भी इस योजना से जुड़े खिलाड़ियों में शामिल हैं।
इस मदद ने उन्हें अपने खेल को बेहतर बनाने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में काफी सहायता दी।
अब ओलंपिक और वर्ल्ड चैंपियनशिप पर नजर
रोम डायमंड लीग में 92.62 मीटर का रिकॉर्ड थ्रो और अब कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में गोल्ड मेडल जीतने के बाद रुमेश थरंगा पथिरागे पुरुष जैवलिन थ्रो में एक बड़े नाम के रूप में उभर चुके हैं।
आने वाले वर्ल्ड चैंपियनशिप और लॉस एंजेलिस 2028 ओलंपिक में यह श्रीलंकाई खिलाड़ी गोल्ड मेडल के मजबूत दावेदारों में शामिल होगा।
क्रिकेट से जैवलिन तक का उनका सफर संघर्ष, मेहनत और सफलता की मिसाल बन गया है।

