बदल गए Birth Registration के नियम, 2 साल की देरी पर जाना पड़ेगा कोर्ट, संसद से कानून पास
Birth Registration Rule: संसद ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण संशोधन विधेयक, 2026 (Births and Deaths Registration Amendment Bill 2026) को मंजूरी दे दी है। राज्यसभा में मंगलवार को ध्वनिमत से पारित होने के बाद अब यह विधेयक कानून बनने की दिशा में आगे बढ़ गया है।
सरकार का कहना है कि नए प्रावधानों का उद्देश्य जन्म और मृत्यु के रिकॉर्ड को अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और फर्जीवाड़े से मुक्त बनाना है।
2 साल से ज्यादा देरी पर कोर्ट का आदेश जरूरी
नए कानून के तहत जन्म या मृत्यु का पंजीकरण (Birth & Death Registration) 21 दिनों के भीतर कराने की मौजूदा व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है। 21 दिन से लेकर एक साल तक की देरी होने पर पहले की तरह निर्धारित प्रक्रिया और विलंब शुल्क के साथ रजिस्ट्रेशन कराया जा सकेगा।
हालांकि, एक साल से अधिक और दो साल के भीतर रजिस्ट्रेशन कराने के लिए अब जिला मजिस्ट्रेट (DM), उप-मंडल मजिस्ट्रेट (SDM) या उनके अधिकृत कार्यपालक दंडाधिकारी की अनुमति लेनी होगी।
यदि दो साल से ज्यादा की देरी होती है, तो अब न्यायिक मजिस्ट्रेट (Judicial Magistrate) के आदेश के बिना जन्म या मृत्यु का पंजीकरण नहीं कराया जा सकेगा। अनुमति देने से पहले अधिकारियों को सभी दस्तावेजों और तथ्यों की जांच भी करनी होगी।
सरकार ने क्यों किया कानून में बदलाव?
गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय (Nityanand Rai) ने कहा कि समय पर जन्म और मृत्यु का पंजीकरण बेहद जरूरी है। जन्म प्रमाणपत्र के आधार पर ही बच्चों को शिक्षा, पहचान, सरकारी योजनाओं और कई कानूनी अधिकारों का लाभ मिलता है, जबकि मृत्यु का सही रिकॉर्ड प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाओं के लिए आवश्यक होता है।
सरकार का कहना है कि नए नियमों से फर्जी दस्तावेजों के जरिए देर से होने वाले पंजीकरण पर रोक लगेगी और सरकारी रिकॉर्ड पहले से अधिक प्रमाणिक बनेंगे।
संसद में हंगामे के बीच पास हुआ विधेयक
विधेयक (Births and Deaths Registration Amendment Bill 2026) पर चर्चा के दौरान विपक्ष ने गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) की अनुपस्थिति को लेकर सवाल उठाए और सदन में नारेबाजी भी की। इसके बावजूद संक्षिप्त चर्चा के बाद राज्यसभा ने विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया। इससे पहले 31 जुलाई को यह विधेयक लोकसभा से भी मंजूर हो चुका था।
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