JPSC एग्जाम रद्द करने पर घमासान, अब सफल अभ्यर्थी पहुंचे कोर्ट, सरकार के फैसले को दी चुनौती
JPSC Recruitment Controversy: झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहा विवाद अब अदालत तक पहुंच गया है। लंबे आंदोलन के बाद सरकार ने 22 भर्ती परीक्षाएं रद्द करने का फैसला लिया था, लेकिन इस फैसले से परीक्षा में सफल हुए अभ्यर्थी नाराज हो गए हैं। अब उन्होंने झारखंड हाईकोर्ट (Jharkhand High Court) का दरवाजा खटखटाकर सरकार के फैसले को चुनौती दी है।
सफल अभ्यर्थियों की ओर से हाईकोर्ट में कुल तीन याचिकाएं दाखिल की गई हैं। इनमें JPSC की 11वीं से 13वीं परीक्षा रद्द किए जाने के फैसले के खिलाफ याचिका भी शामिल है। इसके अलावा फूड सेफ्टी ऑफिसर भर्ती परीक्षा (Food Safety Officer Recruitment) को रद्द करने के मामले में भी अदालत का रुख किया गया है। अलग-अलग रद्द की गई परीक्षाओं में सफल अभ्यर्थियों ने सरकार के फैसले को अपने भविष्य के लिए बड़ा झटका बताया है।
सफल अभ्यर्थियों ने कहा- फैसला एकतरफा
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने भर्ती परीक्षा में सफलता हासिल की और चयन प्रक्रिया के अलग-अलग चरण पूरे किए, लेकिन बाद में पूरी परीक्षा ही रद्द कर दी गई। उनका आरोप है कि सरकार का यह फैसला एकतरफा है और इससे उन अभ्यर्थियों के भविष्य पर गंभीर असर पड़ा है, जिन्होंने अपनी मेहनत और सफलता के आधार पर नियुक्ति की उम्मीद बनाई थी।
अभ्यर्थियों ने मामले में जल्द सुनवाई की मांग की है। इन याचिकाओं पर गुरुवार को सुनवाई होने की संभावना है। अब सभी की नजर हाईकोर्ट के अगले कदम पर है।
रांची में आमने-सामने दो गुट, नियुक्त अभ्यर्थी भी आंदोलन पर
सरकार के फैसले के बाद रांची में भर्ती परीक्षाओं को लेकर दो अलग-अलग तरह के प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं। एक तरफ वे छात्र हैं, जो कथित गड़बड़ियों और अनियमितताओं को लेकर करीब एक महीने से आंदोलन कर रहे थे और परीक्षाएं रद्द करने की मांग कर रहे थे।
वहीं दूसरी तरफ वे अभ्यर्थी हैं, जिन्हें JSSC-CGL (Jharkhand Staff Selection Commission Combined Graduate Level) के जरिए नियुक्ति मिल चुकी थी। ये चयनित अभ्यर्थी अब अपनी नौकरी बचाने के लिए प्रोजेक्ट भवन और सचिवालय के बाहर धरने पर बैठे हैं।
इन अभ्यर्थियों का कहना है कि उनकी नियुक्ति हाईकोर्ट के आदेश के बाद हुई थी। कई लोगों ने अपनी पुरानी सरकारी, निजी या केंद्र सरकार की नौकरी तक छोड़ दी थी। अब परीक्षा और नियुक्ति रद्द होने की आशंका से उनके सामने दोबारा बेरोजगारी का संकट खड़ा हो गया है। वे सरकार से लिखित आदेश जारी करने और अपना पक्ष स्पष्ट करने की मांग कर रहे हैं।
आंदोलन के बाद सरकार ने लिया परीक्षाएं रद्द करने का फैसला
दरअसल, झारखंड में छात्र संगठनों की ओर से लंबे समय से भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और अनियमितताओं की शिकायत की जा रही थी। इसी बीच छात्रों ने परीक्षाओं को रद्द करने की मांग को लेकर आंदोलन तेज कर दिया था।
सरकार ने CID और SIT जांच में सामने आए तथ्यों का हवाला देते हुए कई भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया। साथ ही भर्ती प्रक्रिया में सुधार के लिए एक परीक्षा सुधार समिति (Exam Reform Committee) का भी गठन किया गया है।
अब सरकार के सामने नई चुनौती यह है कि जिन परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों को संतुष्ट करने के लिए रद्दीकरण का फैसला लिया गया, उसी फैसले से सफल अभ्यर्थियों का एक बड़ा वर्ग प्रभावित हो गया है। ऐसे में हाईकोर्ट में दाखिल याचिकाओं पर होने वाली सुनवाई झारखंड की भर्ती प्रक्रिया और हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य के लिए बेहद अहम मानी जा रही है।
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