12 लाख में हाईकोर्ट, 90 लाख में SDM! आगरा में सरकारी नौकरी के नाम पर करोड़ों की ठगी का आरोप
Agra Government Job Scam: सरकारी नौकरी के लिए युवा सालों मेहनत करते हैं, लेकिन आगरा में नौकरी लगवाने के नाम पर लाखों रुपये लेने का मामला सामने आया है। खेरागढ़ तहसील से जुड़े राजेश बघेल पर अलग-अलग लोगों को सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा देकर रकम लेने के आरोप हैं। शिकायत के बाद अब कई पीड़ित सामने आए हैं।
मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि आरोपों में SDM की नौकरी के लिए 90 लाख रुपये और हाईकोर्ट में नौकरी के नाम पर करीब 12 लाख रुपये लेने की बात सामने आई है। एक अन्य पीड़ित ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में नौकरी के लिए 12 लाख रुपये देने और नियुक्ति पत्र के बाद ट्रेनिंग कराए जाने का दावा किया है।
SDM से हाईकोर्ट तक नौकरी का दावा
प्रबल प्रताप का आरोप है कि उन्होंने अपने भाई को हाईकोर्ट में नौकरी दिलाने के लिए करीब 12 लाख रुपये दिए, लेकिन नौकरी नहीं मिली। वहीं योगेंद्र के मुताबिक, बेटे को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में नौकरी दिलाने के नाम पर 12 लाख रुपये लिए गए। दावा है कि नियुक्ति पत्र देने के बाद करीब तीन महीने तक ट्रेनिंग भी कराई गई, लेकिन नौकरी नहीं मिली।
पीड़ितों का कहना है कि जिला पंचायत, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, हाईकोर्ट और अन्य सरकारी पदों पर नौकरी दिलाने का भरोसा दिया जाता था। फर्जी नियुक्ति पत्र (Fake Appointment Letter) देने और सरकारी विभागों के मुख्यालय तक ले जाकर विश्वास कायम करने के आरोप भी लगाए गए हैं।
BJP विधायक के भाई से भी जुड़ा मामला
मामले (Agra Government Job Scam) में बड़ा मोड़ तब आया जब खेरागढ़ के भाजपा विधायक भगवान सिंह कुशवाहा के भाई विजय पाल बघेल से जुड़ा मामला सामने आया। आरोप है कि उनके बेटे की सरकारी नौकरी के लिए भी राजेश बघेल से संपर्क हुआ, रकम दी गई और विधायक के भतीजे को हाथरस के एक सरकारी विभाग में ट्रेनिंग तक दिलाई गई।
इसी संपर्क के जरिए राजेश का मोबाइल नंबर दूसरे लोगों तक पहुंचने और उनके भी उसके संपर्क में आने का दावा किया गया है। पीड़ितों के मुताबिक, अब तक दो करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम नौकरी के नाम पर लिए जाने के आरोप सामने आए हैं। कुछ लोगों ने आरोपी के खिलाफ पहले से अलग-अलग थानों में मामले दर्ज होने का भी दावा किया है।
राजेश बघेल के निजी डिग्री कॉलेज में प्राचार्य रहने की बात भी सामने आई है। पीड़ितों का आरोप है कि इसी पहचान और भरोसे का इस्तेमाल नौकरी के नाम पर लोगों को अपने जाल में फंसाने के लिए किया गया।
अब जांच में फर्जी नियुक्ति पत्र, पैसों के लेन-देन, सरकारी विभागों के नाम के इस्तेमाल और कथित नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की पड़ताल अहम होगी। पीड़ितों ने मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
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