शिखर सम्मेलन में बोले PM मोदी, तय करना होगा अगले 20 वर्षों का रोडमैप
Sandesh Wahak Digital Desk: नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के उद्घाटन सत्र समावेशी वैश्विक शासन और बहुपक्षवाद को मजबूत करना में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संगठन के 20 वर्षों के सफर को रेखांकित करते हुए एक नए और महत्वाकांक्षी युग का आह्वान किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ब्रिक्स किसी के खिलाफ नहीं है, बल्कि सभी को साथ लेकर चलने में विश्वास रखता है।
भारत की अध्यक्षता को जन-केंद्रित और मानवता प्रथम बताते हुए पीएम मोदी ने कहा कि इस कार्यकाल के दौरान भारत के 30 शहरों में 350 से अधिक बैठकें आयोजित की गईं, जिससे ब्रिक्स सहयोग को सीधे आम जनता से जोड़ा जा सका।
विशेषाधिकार के पिरामिड को बदलना होगा
प्रधानमंत्री ने मौजूदा वैश्विक शासन व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह एक ऐसे पिरामिड’ की तरह है, जहाँ शक्ति शीर्ष पर सीमित है और प्रभावित होने वाले देश निर्णय प्रक्रिया से बाहर हैं। उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ वैश्विक संकटों का सबसे पहला शिकार होता है, लेकिन निर्णय लेने में सबसे पीछे है। पीएम मोदी ने इस व्यवस्था को विशेषाधिकार के पिरामिड से हटाकर साझेदारी के मंच में बदलने का जोर दिया, जहाँ हर देश की आवाज़ को बराबरी का सम्मान मिले।
UNSC reforms CANNOT be delayed. pic.twitter.com/R4K7aNG0kK
— Smriti Z Irani (@smritiirani) September 12, 2026
PM मोदी ने रखे दो प्रमुख वैश्विक प्रस्ताव
ब्रिक्स कंटिन्युटी एंड इम्प्लीमेंटेशन मैकेनिज्म: हर साल अध्यक्षता बदलने के बावजूद संस्थागत निरंतरता बनी रहे, इसके लिए ट्रोइका (Troika) व्यवस्था के तहत फैसलों की लगातार समीक्षा और क्रियान्वयन हेतु यह तंत्र बनाने का सुझाव दिया।
10-पॉइंट ग्लोबल गवर्नेंस रिफॉर्म्स: वैश्विक संस्थाओं में सुधार के लिए सभी सदस्य देश मिलकर 10 प्रस्ताव तैयार करें, जिन्हें अगले शिखर सम्मेलन तक एक व्यापक ‘ब्रिक्स रिफॉर्म रोडमैप’ का रूप दिया जा सके।
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