छपरा पिटलाइन पर मेंटेनेंस के दौरान हाई-टेंशन लाइन की चपेट में आया रेल कर्मचारी, हालत नाजुक
Sandesh Wahak Digital Desk: पूर्वोत्तर रेलवे (वाराणसी मंडल) के अंतर्गत आने वाले छपरा पिटलाइन पर मेंटेनेंस ड्यूटी के दौरान एक बड़ा और दर्दनाक हादसा सामने आया है। ट्रेन के रखरखाव कार्य में लगे एसी मैकेनिक (हेल्पर) अर्जुन कुमार गुप्ता अचानक 25,000 वोल्ट की ओवरहेड इक्विपमेंट हाई-टेंशन लाइन की चपेट में आ गए। करंट लगते ही वह बेहद गंभीर रूप से झुलस गए। दुर्घटना के तुरंत बाद उन्हें अत्यंत चिंताजनक स्थिति में इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
इस दुखद घटना पर पूर्वोत्तर रेलवे कर्मचारी संघ के महामंत्री एवं नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन रेलवेमेन के सहायक महामंत्री विनोद कुमार राय ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए रेल प्रशासन से पीड़ित कर्मचारी को तत्काल उत्कृष्ट चिकित्सा सहायता और प्रशासनिक व वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की पुरजोर मांग की है।
सुरक्षा नियमों की अनदेखी बनी हादसे का कारण
जानकारी के मुताबिक, यह खौफनाक हादसा 17 सितंबर को अमृतसर-छपरा एक्सप्रेस के पिटलाइन पर नियमित रखरखाव (मेंटेनेंस) के दौरान हुआ। रेलवे के स्थापित सुरक्षा नियमों के अनुसार, किसी भी ट्रेन की ओएचई लाइन को चार्ज करने के बाद पेंटोग्राफ को हटाकर लाइन को पूरी तरह डिस्चार्ज कराना अनिवार्य प्रक्रिया है। इस पूरी प्रक्रिया में आमतौर पर एक से दो घंटे का समय लगता है। आरोप है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी करते हुए बिना OHE लाइन को डिस्चार्ज कराए ही कर्मचारी को एसी का फिल्टर खोलने के लिए ट्रेन की छत पर चढ़ा दिया गया। जैसे ही कर्मचारी ऊपर पहुंचा, वह हाई-टेंशन तार के संपर्क में आ गया और करंट की चपेट में आकर बुरी तरह जल गया।
निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग
मामले की गंभीरता को देखते हुए PRKS के महामंत्री विनोद कुमार राय ने प्रमुख मुख्य विद्युत इंजीनियर, पूर्वोत्तर रेलवे, गोरखपुर को एक आधिकारिक पत्र प्रेषित कर इस पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने पत्र के जरिए सवाल उठाया कि सुरक्षा मानकों का खुल्लम-खुल्ला उल्लंघन कर किसके आदेश पर कर्मचारी को जान जोखिम में डालकर छत पर भेजा गया था? राय ने चेतावनी दी है कि इस लापरवाही के लिए जो भी अधिकारी या सुपरवाइजर जिम्मेदार हो, उसके खिलाफ सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य में किसी अन्य कर्मचारी की जान संकट में न पड़े।
हादसे पर आक्रोश जताते हुए विनोद कुमार राय ने स्कॉर्टिंग, मेंटेनेंस और अन्य संवेदनशील रेल परिचालन कार्यों में प्राइवेट (ठेके के) कर्मचारियों की तैनाती तथा नियमित रेल कर्मचारियों की लगातार हो रही कमी पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। संघ ने स्पष्ट किया है कि इतने संवेदनशील मेंटेनेंस कार्यों को केवल प्राइवेट कर्मचारियों के भरोसे छोड़ना तुरंत बंद होना चाहिए। वर्तमान व्यवस्था में एक नियमित रेल कर्मचारी के साथ दो ठेका कर्मचारियों को भेजकर पूरा दारोमदार अकेले नियमित कर्मचारी पर डाल दिया जाता है। इसके कारण रेल कर्मचारी अत्यधिक मानसिक तनाव और दबाव में काम करने को मजबूर हैं, जिससे हादसों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
सुरक्षा नियमों में बदलाव की मांग
पूर्वोत्तर रेलवे कर्मचारी संघ ने मांग रखी है कि जब तक खाली पड़े पदों पर नई और स्थाई भर्तियां नहीं हो जातीं, तब तक किसी भी स्कॉर्टिंग या मेंटेनेंस टीम में कम से कम दो नियमित रेल कर्मचारी अनिवार्य रूप से तैनात किए जाएं। संघ ने रेलवे प्रशासन को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि रेल कर्मचारियों की सुरक्षा और जीवन से किसी भी प्रकार का खिलवाड़ कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और यदि समय रहते सुधार नहीं किए गए तो संगठन आंदोलन का रास्ता अपनाने को विवश होगा।
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