फर्जी नंबर, नकली FASTag और टोल चोरी का खेल, UP STF ने रैकेट का किया भंडाफोड़
UP Fake FASTag Racket: उत्तर प्रदेश में फर्जी FASTag और नकली रजिस्ट्रेशन नंबर के जरिए टोल प्लाजा और ऑनलाइन ट्रैफिक चालान से बचने वाले कथित रैकेट का STF ने खुलासा किया है। जांच में सामने आया कि इस तरीके का इस्तेमाल हाईवे पर चलने वाले भारी वाहनों में किया जा रहा था, जिनमें कथित तौर पर ओवरलोडेड मिनरल मटेरियल और मोरंग ले जाई जाती थी।
यूपी स्पेशल टास्क फोर्स (UP STF) ने इस मामले में सीतापुर निवासी 28 वर्षीय मनीष को गिरफ्तार किया है। STF ने उसे सोमवार को लखनऊ के मड़ियाऊं क्षेत्र में इंजीनियरिंग कॉलेज चौराहे के पास से पकड़ा। अधिकारियों के मुताबिक, कार्रवाई सरोजिनी नगर थाने में दर्ज मुकदमे की जांच के दौरान हुई। मामले में BNS की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज है।
ऐसे चलता था फर्जी FASTag का खेल
STF की जांच के मुताबिक, आरोपी असली वाहन के बजाय फर्जी रजिस्ट्रेशन नंबर से लिंक FASTag का इस्तेमाल करते थे। इससे टोल प्लाजा और ऑनलाइन ट्रैफिक सिस्टम में वास्तविक वाहन की पहचान छिप जाती थी। रास्ते में चालान होने पर वह भी कथित तौर पर फर्जी नंबर वाले वाहन के नाम पर दर्ज हो जाता था।
जांच में UP32 ZN 8925 नंबर के एक वाहन का पता चला है। यह वाहन रियाज के नाम पर है और कथित तौर पर उसका भाई सिराज इसे चलवाता था। STF के मुताबिक, इसमें MA34 S 9455 नंबर से जुड़ा फर्जी FASTag इस्तेमाल किया जा रहा था।
STF के एडिशनल एसपी सत्यसेन के अनुसार, सिराज ने सीतापुर के खैराबाद टोल प्लाजा के पास मौजूद इंडसइंड बैंक के FASTag एजेंट से यह टैग हासिल किया था। इसके लिए ड्राइविंग लाइसेंस, मोबाइल नंबर और फर्जी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है।
खास बात यह थी कि FASTag को वाहन की विंडस्क्रीन पर स्थायी रूप से नहीं लगाया जाता था। ड्राइवर इसे अलग रखता और टोल पार करते समय मैन्युअली दिखाता था। टोल की रसीदें भी संभालकर रखी जाती थीं, ताकि रूट चेकिंग के दौरान उन्हें दिखाया जा सके।
हर ट्रिप के मिलते थे 1,500 रुपये
पूछताछ में मनीष ने कथित तौर पर बताया कि वह सिराज के लिए वाहन चलाता था और उसे हर ट्रिप के 1,500 रुपये मिलते थे। उसके मुताबिक, उसे फर्जी FASTag इस्तेमाल करने का तरीका भी बताया गया था।
UP STF अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में कितने वाहन शामिल थे, कितने टोल ट्रांजैक्शन और ऑनलाइन चालान प्रभावित हुए और इससे सरकारी राजस्व को कितना नुकसान हुआ। मनीष को अदालत में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। अन्य आरोपियों और फर्जी FASTag व दस्तावेज तैयार कराने वाले नेटवर्क की जांच जारी है।
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