बलरामपुर में 11 करोड़ के MDM घोटाले के बीच शिक्षामित्र की सक्रियता पर उठे सवाल
Balrampur News: उत्तर प्रदेश के बलरामपुर में मध्याह्न भोजन (एमडीएम) योजना से जुड़े करीब 11 करोड़ रुपये के कथित घोटाले का मामला अभी चर्चा में है। इसी बीच नगर संसाधन केंद्र (यूआरसी) में एक शिक्षामित्र की कथित अनधिकृत सक्रियता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) की ओर से रोके जाने के बावजूद शिक्षामित्र जुहैब काजिम दोबारा केंद्र पर विभागीय फाइलों का काम करने लगा है।
बताया जा रहा है कि जुहैब काजिम को करीब एक महीने पहले बीएसए ने फटकार लगाकर केंद्र से हटा दिया था। अब आरोप है कि खंड शिक्षा अधिकारी की कथित मेहरबानी से वह फिर यूआरसी में काम करने लगा है। हालांकि, इस मामले में अधिकारियों के बयान सामने आए हैं और उन्होंने शिक्षामित्र की भूमिका को लेकर अपना पक्ष रखा है।
22 स्कूलों और पांच मदरसों के एमडीएम का हिसाब यूआरसी के पास
जिला मुख्यालय और उतरौला नगर के 22 परिषदीय विद्यालयों तथा पांच मदरसों में मध्याह्न भोजन योजना संचालित है। इन संस्थानों में भोजन की फीडिंग और कन्वर्जन कॉस्ट यानी भोजन तैयार करने की लागत से जुड़े लेखा-जोखा की जिम्मेदारी नगर संसाधन केंद्र के पास है।

आरोप है कि प्राथमिक विद्यालय सेवा समिति में तैनात शिक्षामित्र जुहैब काजिम को नियमों के विपरीत इस काम में लगा दिया गया। वह स्कूलों और मदरसों से भोजन की खपत से जुड़ी जानकारी जुटाकर जिला स्तर पर भेज रहा है।
इस व्यवस्था को लेकर आशंका जताई जा रही है कि रिपोर्टिंग में गड़बड़ी हो सकती है और पुराने घोटाले से जुड़े साक्ष्यों में बदलाव की कोशिश भी हो सकती है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में इन आशंकाओं की पुष्टि करने वाला कोई ठोस साक्ष्य सामने नहीं आया है।
जिला समन्वयक बोले- लेखाकार की है जिम्मेदारी, बीएसए ने दी कार्रवाई की चेतावनी
एमडीएम सेल के जिला समन्वयक ऋषभ श्रीवास्तव ने स्पष्ट किया कि नगर संसाधन केंद्र में सूचनाएं जुटाने की अधिकृत जिम्मेदारी लेखाकार प्रतीक श्रीवास्तव की है। उन्होंने कहा कि शिक्षामित्र के इस काम में दखल देने की जानकारी उन्हें नहीं है।
वहीं, बीएसए विकास चंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि शिक्षामित्र को विभागीय काम में हस्तक्षेप करने और बिना किसी कारण कार्यालय आने से पूरी तरह रोक दिया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि दोबारा दखलअंदाजी सामने आई, तो सीधे कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
11 करोड़ रुपये के कथित एमडीएम घोटाले के बीच यह मामला विभागीय व्यवस्था और जिम्मेदारियों के पालन पर सवाल खड़े करता है। फिलहाल, शिक्षामित्र की भूमिका और लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
रिपोर्ट: योगेंद्र त्रिपाठी
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