क्या रोज बादाम खाने से बढ़ती है आंखों की रोशनी? जानिए विज्ञान क्या कहता है

Health Tips: बादाम को दिमाग और याददाश्त के लिए फायदेमंद माना जाता है। लेकिन इसके पोषक तत्व आंखों की सेहत के लिए भी उपयोगी हो सकते हैं। इसमें विटामिन ई, प्रोटीन, फाइबर, मैग्नीशियम और हेल्दी फैट्स पाए जाते हैं। खासतौर पर विटामिन ई शरीर की कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव नुकसान से बचाने में भूमिका निभाता है।

अमेरिकी नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) के अनुसार, करीब 28 ग्राम यानी एक औंस बादाम में लगभग 6.8 से 7.3 मिलीग्राम विटामिन ई हो सकता है। यह एक वयस्क की रोजाना जरूरत का करीब आधा हिस्सा है। हालांकि, आंखों के लिए जरूरी सभी पोषक तत्व बादाम से नहीं मिलते। रेटिना में पाए जाने वाले ल्यूटिन और जियाजैंथिन के लिए हरी पत्तेदार सब्जियां भी खाना जरूरी है।

आंखों की कोशिकाओं के लिए क्यों जरूरी है विटामिन ई?

आंखों को स्वस्थ रखने के लिए सिर्फ साफ दिखाई देना ही काफी नहीं है। आंखों के अलग-अलग हिस्सों की कोशिकाओं का स्वस्थ रहना भी जरूरी है। नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन (NCBI) के मुताबिक, शरीर में जब फ्री रेडिकल्स और उनसे बचाव करने वाले एंटीऑक्सिडेंट्स के बीच संतुलन बिगड़ता है, तो इसे ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस कहा जाता है।

लंबे समय तक रहने वाला ऑक्सीडेटिव नुकसान उम्र के साथ होने वाली आंखों की कुछ बीमारियों से जुड़ा पाया गया है। विटामिन ई एक एंटीऑक्सिडेंट है, जो कोशिकाओं की बाहरी परत यानी झिल्ली को ऐसे नुकसान से बचाने में मदद करता है।

इस लिहाज से बादाम संतुलित भोजन का अच्छा हिस्सा हो सकता है। लेकिन किसी पोषक तत्व का शरीर के लिए फायदेमंद होना और उससे आंखों की रोशनी बढ़ना एक जैसी बातें नहीं हैं।

क्या बादाम खाने से चश्मे का नंबर कम हो सकता है?

कई लोगों का मानना है कि रोज सुबह भीगे हुए बादाम खाने से आंखों की नजर तेज होती है और धीरे-धीरे चश्मे का नंबर कम हो जाता है। लेकिन इस दावे के समर्थन में मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं।

चश्मे का नंबर आमतौर पर मायोपिया, हाइपरोपिया और एस्टिग्मैटिज्म जैसी रिफ्रैक्टिव समस्याओं के कारण होता है। मायोपिया में दूर की चीजें साफ नहीं दिखतीं, जबकि हाइपरोपिया में पास की चीजें देखने में परेशानी हो सकती है। एस्टिग्मैटिज्म में नजर धुंधली या विकृत हो सकती है।

इन समस्याओं में आंख की बनावट या रोशनी को रेटिना पर सही तरीके से फोकस करने की क्षमता प्रभावित होती है। केवल बादाम खाने से आंखों की बनावट नहीं बदलती। इसलिए इससे चश्मे का नंबर कम होने की उम्मीद करना सही नहीं है।

अमेरिकन एकेडमी ऑफ ऑप्थैल्मोलॉजी के अनुसार, पोषक तत्वों से भरपूर भोजन आंखों की सामान्य सेहत बनाए रखने में मदद कर सकता है। लेकिन इससे चश्मे की जरूरत खत्म नहीं होती। बादाम को चश्मे या डॉक्टर के बताए इलाज का विकल्प नहीं समझना चाहिए।

क्या बादाम से ड्राई आई और स्क्रीन की थकान में राहत मिलती है?

मोबाइल, लैपटॉप और कंप्यूटर पर लंबे समय तक काम करने से आंखों में सूखापन, जलन, भारीपन और धुंधलापन महसूस हो सकता है। स्क्रीन पर लगातार ध्यान लगाने के दौरान पलकें कम झपकती हैं। इससे आंखों की सतह पर आंसुओं की परत प्रभावित हो सकती है।

नेशनल आई इंस्टीट्यूट के मुताबिक, लंबे समय तक स्क्रीन देखने की आदत ड्राई आई की समस्या में योगदान दे सकती है। इससे बचने के लिए कुछ आसान तरीके अपनाए जा सकते हैं:

  • 20-20-20 नियम अपनाएं: हर 20 मिनट बाद करीब 20 फीट दूर रखी किसी चीज को 20 सेकंड तक देखें।
  • पलकें झपकाते रहें: स्क्रीन देखते समय नियमित रूप से पलकें झपकाना जरूरी है।
  • स्क्रीन की दूरी और रोशनी सही रखें: स्क्रीन को आंखों से उचित दूरी पर रखें और उसकी चमक आरामदायक स्तर पर रखें।
  • आई ड्रॉप्स का इस्तेमाल: लगातार सूखापन या जलन होने पर डॉक्टर की सलाह से आई ड्रॉप्स लें।
  • लक्षण बने रहने पर जांच कराएं: आंखों में लगातार दर्द, लालिमा, रोशनी से परेशानी या धुंधला दिखने पर नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क करें।

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