SGPGI में ट्रांसप्लांट एनेस्थीसिया पर राष्ट्रीय CME, विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव
Lucknow SGPGI: लखनऊ स्थित संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) में शनिवार को अंग प्रत्यारोपण के दौरान मरीजों की देखभाल और सुरक्षा से जुड़े विषयों पर राष्ट्रीय स्तर का चिकित्सा कार्यक्रम आयोजित किया गया। एनेस्थीसियोलॉजी विभाग की ऑर्गन ट्रांसप्लांट एनेस्थीसिया यूनिट ने प्रो. सोमा कौशिक ऑडिटोरियम में राष्ट्रीय सतत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम (सीएमई) और पहली एसजीपीजीआई ट्रांसप्लांट एनेस्थीसिया मीट (एसटीएएम) का आयोजन किया।
कार्यक्रम का विषय ‘सॉलिड ऑर्गन ट्रांसप्लांटेशन: करंट एडवांसेज इन पेशेंट केयर’ रहा। नेशनल एकेडमी ऑफ मेडिकल साइंसेज (एनएएमएस) से प्रायोजित और मान्यता प्राप्त इस आयोजन को इंडियन सोसाइटी ऑफ एनेस्थीसियोलॉजिस्ट्स के उत्तर प्रदेश चैप्टर का सहयोग मिला।
अंग प्रत्यारोपण में एनेस्थीसियोलॉजिस्ट की भूमिका पर चर्चा
सीएमई में देश के अलग-अलग चिकित्सा संस्थानों से 15 से अधिक विशेषज्ञ वक्ताओं और करीब 60 चिकित्सकों ने भाग लिया। विशेषज्ञों ने अंग प्रत्यारोपण के दौरान मरीजों की सुरक्षा, ऑपरेशन से पहले और बाद में देखभाल तथा गंभीर मरीजों के इलाज और प्रबंधन में एनेस्थीसियोलॉजिस्ट की भूमिका पर विचार साझा किए।
आयोजन सचिव डॉ. दिव्या श्रीवास्तव ने बताया कि देश में अंग प्रत्यारोपण की सुविधाएं लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन इस क्षेत्र में प्रशिक्षित एनेस्थीसियोलॉजिस्ट की संख्या अभी जरूरत से कम है। एमडी एनेस्थीसियोलॉजी के बाद तीन साल के डीएम ऑर्गन ट्रांसप्लांट एनेस्थीसिया पाठ्यक्रम की देशभर में केवल पांच सीटें उपलब्ध हैं।
उन्होंने बताया कि एसजीपीजीआई में दो साल की ऑर्गन ट्रांसप्लांट फेलोशिप के तहत हर साल चार चिकित्सकों को प्रशिक्षण दिया जाता है। इस कार्यक्रम का मकसद विशेषज्ञों के अनुभव साझा करना और युवा डॉक्टरों को अंग प्रत्यारोपण के दौरान आने वाली चुनौतियों और उनके समाधान के बारे में जानकारी देना है।
पांच चिकित्सा संस्थानों को दे रहा तकनीकी सहयोग
एसजीपीजीआई की ट्रांसप्लांट टीम दूसरे चिकित्सा संस्थानों में भी किडनी प्रत्यारोपण कार्यक्रम शुरू करने और उन्हें विकसित करने में मदद कर रही है। इसके तहत एम्स जोधपुर, एम्स बठिंडा, एम्स रायपुर, केजीएमयू लखनऊ और सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज, आगरा को तकनीकी और शैक्षणिक सहयोग दिया गया है।
संस्थान के निदेशक पद्मश्री प्रो. आर.के. धीमन ने आयोजन समिति को बधाई दी। उन्होंने कहा कि एसजीपीजीआई अंग प्रत्यारोपण सेवाओं को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। संस्थान में जीवित दाताओं और मृत्योपरांत अंगदान के जरिए किडनी और लिवर प्रत्यारोपण किए जा रहे हैं। इसके अलावा उत्तर प्रदेश का पहला सफल हार्ट ट्रांसप्लांट भी एसजीपीजीआई में किया गया है।
प्रो. धीमन ने बताया कि ट्रांसप्लांट एनेस्थीसिया और क्रिटिकल केयर के विशेषज्ञों की बढ़ती जरूरत को देखते हुए संस्थान में ऑर्गन ट्रांसप्लांटेशन एवं क्रिटिकल केयर में डीएम पाठ्यक्रम शुरू करने की योजना है।
उद्घाटन समारोह में ये अधिकारी और डॉक्टर रहे मौजूद
कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि पद्मश्री प्रो. राजेंद्र प्रसाद मौजूद रहे। उनके साथ एनएएमएस के उत्तर प्रदेश कन्वीनर और एसजीपीजीआई के कार्यवाहक निदेशक प्रो. शालीन कुमार, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक तथा संस्थान के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए।
आयोजन समिति में डॉ. संजय धीरज और डॉ. संदीप साहू आयोजन अध्यक्ष रहे। डॉ. दिव्या श्रीवास्तव ने आयोजन सचिव, डॉ. तापस कुमार सिंह ने सह-आयोजन सचिव और डॉ. तन्वी भार्गव ने कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली। आयोजन टीम में डॉ. वैशाली अग्रवाल और डॉ. तृप्ति सिंह भी शामिल रहीं।
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