तेजी से झड़ रहे हैं बाल तो हो जाएं सावधान, थायरॉइड की गड़बड़ी भी हो सकती है वजह

Thyroid Hair Loss: बालों का झड़ना आम समस्या है, लेकिन जब कंघी करते समय सामान्य से ज्यादा बाल निकलने लगें, सिर के बाल पतले दिखें या बालों की मांग चौड़ी होने लगे तो चिंता बढ़ जाती है। अक्सर लोग इसके लिए तनाव, खानपान या हेयर केयर प्रोडक्ट्स को जिम्मेदार मानते हैं। हालांकि, शरीर में थायरॉइड हार्मोन का असंतुलन भी इसकी एक वजह हो सकता है।

थायरॉइड गर्दन के सामने मौजूद छोटी-सी ग्रंथि है। यह शरीर के मेटाबॉलिज्म यानी ऊर्जा के इस्तेमाल की प्रक्रिया को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाती है। इसके हार्मोन बालों की जड़ों और उनकी बढ़त के चक्र को भी प्रभावित करते हैं। जब ये हार्मोन कम या ज्यादा बनने लगते हैं, तो बालों की सामान्य वृद्धि पर असर पड़ सकता है।

थायरॉइड हार्मोन बालों की बढ़त को कैसे प्रभावित करते हैं?

बाल एक तय प्राकृतिक चक्र के तहत बढ़ते हैं। इसे हेयर ग्रोथ साइकिल कहा जाता है। इसके तीन मुख्य चरण होते हैं।

  • एनाजेन फेज: यह बालों के बढ़ने का चरण है। इस दौरान बालों की जड़ें सक्रिय रहती हैं और बालों की लंबाई बढ़ती है।
  • कैटाजेन फेज: यह बदलाव का छोटा चरण है। इसमें बालों की बढ़त धीमी होने लगती है।
  • टेलोजेन फेज: इस दौरान बाल आराम की स्थिति में रहते हैं। इसके बाद पुराने बाल झड़ सकते हैं और उनकी जगह नए बाल उगते हैं।

नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन (NCBI) के अनुसार, थायरॉइड हार्मोन खासकर टी3 और टी4 बालों की जड़ों की गतिविधि और उनसे जुड़ी कोशिकाओं पर असर डालते हैं। इन हार्मोन का स्तर सामान्य से कम या ज्यादा होने पर बालों के बढ़ने का चक्र प्रभावित हो सकता है। इससे एक साथ ज्यादा बाल झड़ सकते हैं। बालों की मोटाई और बनावट में भी बदलाव आ सकता है।

हाइपोथायरॉइडिज्म में बालों पर असर

हाइपोथायरॉइडिज्म में थायरॉइड ग्रंथि जरूरत के मुताबिक हार्मोन नहीं बना पाती। इससे शरीर की कई प्रक्रियाएं धीमी हो सकती हैं। इसका असर त्वचा और बालों की सेहत पर भी पड़ता है।

इस स्थिति में बाल सामान्य से ज्यादा झड़ सकते हैं। वे रूखे और बेजान हो सकते हैं या उनकी मोटाई कम हो सकती है। कुछ लोगों की भौंहों के बाहरी हिस्से के बाल भी पतले होने लगते हैं।

अमेरिकन थायरॉइड एसोसिएशन के मुताबिक, हाइपोथायरॉइडिज्म में बाल झड़ने के अलावा थकान, वजन बढ़ना, ठंड ज्यादा लगना, कब्ज, रूखी त्वचा और सुस्ती जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। हालांकि, ये लक्षण दूसरी वजहों से भी हो सकते हैं। इसलिए केवल इनके आधार पर बीमारी की पुष्टि नहीं की जा सकती।

हाइपरथायरॉइडिज्म में भी हो सकता है हेयर लॉस

हाइपरथायरॉइडिज्म में थायरॉइड ग्रंथि जरूरत से ज्यादा हार्मोन बनाने लगती है। इससे शरीर की कई प्रक्रियाएं तेज हो जाती हैं और बालों की जड़ों की सामान्य गतिविधि प्रभावित हो सकती है।

इसका असर बालों की मोटाई पर पड़ सकता है। बाल पतले होने लग सकते हैं या पूरे सिर से ज्यादा मात्रा में झड़ सकते हैं। अमेरिकन थायरॉइड एसोसिएशन भी बाल झड़ने को हाइपरथायरॉइडिज्म के संभावित लक्षणों में शामिल करती है।

हर व्यक्ति में बाल झड़ने की मात्रा और गंभीरता अलग हो सकती है। थायरॉइड का इलाज शुरू होने के दौरान भी कुछ समय तक बाल झड़ने के तरीके में बदलाव महसूस हो सकता है।

क्या बाल झड़ना थायरॉइड की समस्या का शुरुआती संकेत है?

कुछ लोगों में बालों का ज्यादा झड़ना थायरॉइड की गड़बड़ी का शुरुआती संकेत हो सकता है। खासकर तब, जब इसके साथ शरीर में दूसरे बदलाव भी नजर आने लगें। जैसे बालों की मोटाई कम होना, थकान, वजन में बदलाव या ठंड और गर्मी ज्यादा महसूस होना।

ऐसे लक्षण दिखने पर डॉक्टर थायरॉइड की जांच कराने की सलाह दे सकते हैं। लेकिन सिर्फ बाल झड़ने से यह तय नहीं किया जा सकता कि किसी को हाइपोथायरॉइडिज्म है या हाइपरथायरॉइडिज्म।

बाल झड़ने की दूसरी वजहें भी हो सकती हैं। इनमें आयरन की कमी, तनाव, तेज बुखार या हाल में हुई बीमारी, प्रसव के बाद हार्मोन में बदलाव, कुछ दवाएं, आनुवंशिक कारण और पोषण की कमी शामिल हैं।

थायरॉइड हार्मोन बालों की सामान्य बढ़त में अहम भूमिका निभाते हैं। इनके कम या ज्यादा होने पर बाल झड़ सकते हैं, लेकिन हेयर लॉस अपने आप में थायरॉइड बीमारी का पक्का प्रमाण नहीं है। यदि बाल झड़ने के साथ वजन, ऊर्जा, त्वचा या शरीर के तापमान में भी बदलाव दिखे तो डॉक्टर से सलाह लेकर जरूरी जांच कराएं।

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