अब खून की जांच के बिना 20 सेकंड में चलेगा डायबिटीज का खतरा? AI टूल ने दिखाई नई उम्मीद
Diabetes AI Tool: वैज्ञानिकों ने ऐसा AI टूल तैयार किया है, जो सिर्फ 20 सेकंड की आवाज सुनकर टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बता सकता है। इस तकनीक को 21 हजार से ज्यादा लोगों की आवाज के आधार पर विकसित किया गया है।
डायबिटीज की जांच के लिए अब तक ब्लड सैंपल देना जरूरी होता है। इसके लिए लैब में जाकर खून की जांच करानी पड़ती है। कई लोग सुई लगने और खून निकलवाने से डरते हैं। लेकिन अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से इस प्रक्रिया को आसान बनाने की दिशा में नई पहल हुई है।
एक नई तकनीक के जरिए सिर्फ 20 सेकंड की आवाज रिकॉर्ड करके टाइप-2 डायबिटीज का खतरा पहचाना जा सकता है। इस AI टूल को इस तरह तैयार किया गया है कि यह आवाज में होने वाले बदलावों के आधार पर बीमारी की आशंका का अनुमान लगा सके। हालांकि, यह अभी स्क्रीनिंग की तकनीक है, ब्लड टेस्ट या डॉक्टर की जांच का विकल्प नहीं है।
अभी तक इन तीन तरीकों से होती है डायबिटीज की जांच
अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के मुताबिक, डायबिटीज का पता लगाने के लिए मुख्य रूप से तीन तरह के टेस्ट किए जाते हैं।
- HbA1c टेस्ट: इसमें पिछले 2 से 3 महीने के औसत ब्लड शुगर लेवल की जानकारी मिलती है।
- फास्टिंग ब्लड शुगर टेस्ट: इसमें सुबह खाली पेट खून में शुगर का स्तर मापा जाता है।
- ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट: इसमें खाने से पहले और बाद में ब्लड शुगर लेवल की जांच की जाती है।
इन जांचों के लिए खून का सैंपल देना पड़ता है। ऐसे में आवाज के आधार पर डायबिटीज का खतरा पहचानने वाली नई तकनीक को एक अहम कदम माना जा रहा है।
Thymia और RMIT यूनिवर्सिटी ने मिलकर बनाया AI टूल
‘द इंडिपेंडेंट’ की रिपोर्ट के मुताबिक, इस AI टूल को टेक्नोलॉजी फर्म Thymia के इंजीनियरों ने ऑस्ट्रेलिया की मेलबर्न स्थित RMIT यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर तैयार किया है।
यह सिस्टम टाइप-2 डायबिटीज से जुड़े आवाज के बदलावों को पहचानता है। इसमें सांसों पर नियंत्रण कम होना और आवाज में कर्कशता जैसे संकेतों का विश्लेषण किया जाता है। AI इन्हीं बदलावों के आधार पर डायबिटीज के खतरे का अनुमान लगाता है।
इस मॉडल को तैयार करने के लिए ब्रिटेन और अमेरिका के 21 हजार से ज्यादा लोगों की 63 हजार से अधिक वॉइस रिकॉर्डिंग का इस्तेमाल किया गया।
इसकी जांच के दौरान लोगों की 20 सेकंड की ऑडियो क्लिप ली गई। इसमें प्रतिभागी ईसप की कहानियों को जोर से पढ़ रहे थे। इसके बाद ब्रिटेन के 7 हजार से ज्यादा लोगों पर इस स्पीच आधारित तकनीक का परीक्षण किया गया।
अध्ययन में सामने आया कि जिन लोगों ने 80 प्रतिशत मामलों में खुद को टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित बताया था, उन्हें इस टूल ने अधिक जोखिम वाला स्कोर दिया।
इसके अलावा, शोधकर्ताओं ने 801 लोगों के एक अलग समूह पर भी अध्ययन किया। इन लोगों ने आवाज की रिकॉर्डिंग देने के तीन महीने के भीतर घर पर ब्लड टेस्ट कराया था। इस विश्लेषण में AI एल्गोरिदम ने 75 प्रतिशत मामलों में अधिक जोखिम वाला स्कोर दिया।
रिसर्च साइंटिस्ट ने बताया कितना खास है यह AI मॉडल
Thymia की रिसर्च साइंटिस्ट Giedre Cepukaityte के मुताबिक, यह टाइप-2 डायबिटीज की स्पीच आधारित स्क्रीनिंग पर अब तक की सबसे बड़ी वास्तविक दुनिया की स्टडी है।
उन्होंने बताया कि इस अध्ययन में AI मॉडल के अनुमान की तुलना ब्लड टेस्ट के नतीजों के साथ की गई। इसके अलावा, लोगों ने खुद अपनी बीमारी को लेकर जो जानकारी दी थी, उसे भी अध्ययन में शामिल किया गया।
उनके मुताबिक, जिन लोगों में AI ने अधिक जोखिम दिखाया, उनके ब्लड टेस्ट के नतीजे भी उस आशंका से मेल खाते पाए गए।
फोन या ऐप से हो सकेगी स्क्रीनिंग, शुरुआती पहचान में मिलेगी मदद
इस तकनीक की खास बात यह है कि आवाज का सैंपल फोन या ऐप के जरिए लिया जा सकता है। इससे उन लोगों तक भी शुरुआती जांच की सुविधा पहुंचाने में मदद मिल सकती है, जो नियमित रूप से हेल्थ चेकअप नहीं कराते हैं।
अगर इस तकनीक का इस्तेमाल बड़े स्तर पर होता है, तो डायबिटीज के संभावित खतरे की पहचान पहले की जा सकेगी। इससे जरूरत पड़ने पर लोगों को समय रहते ब्लड टेस्ट कराने और डॉक्टर से सलाह लेने के लिए प्रेरित किया जा सकता है।
हालांकि, इस AI टूल से मिले जोखिम के स्कोर को डायबिटीज की पक्की पुष्टि नहीं माना जाना चाहिए। बीमारी की पुष्टि के लिए अभी भी मेडिकल जांच जरूरी है।

