सेंट्रल दिल्ली में विरोध-प्रदर्शनों पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, केंद्र सरकार को नोटिस जारी
Sandesh Wahak Digital Desk: सेंट्रल दिल्ली में बार-बार होने वाले विरोध-प्रदर्शनों और उससे आम जनजीवन तथा कारोबार पर पड़ रहे असर को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। दिल्ली के व्यापारियों की संस्था किराना कमेटी की याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की पीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विरोध-प्रदर्शन करने का अधिकार सभी के पास है, लेकिन इसके नाम पर किसी सार्वजनिक स्थान पर अनिश्चितकाल के लिए कब्जा नहीं जमाया जा सकता। अदालत ने त्योहारी सीजन में सेंट्रल दिल्ली में प्रदर्शनों पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है।
संसद और सुप्रीम कोर्ट तक मार्च की अनुमति नहीं
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों को केवल एक दिन की अनुमति दी गई थी, लेकिन उन्होंने जगह खाली करने के बजाय वहां कब्जा कर लिया और संसद भवन की ओर मार्च करने लगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि संसद और सुप्रीम कोर्ट जैसी महत्वपूर्ण इमारतों तक मार्च करने की इजाजत नहीं दी जा सकती। उन्होंने यह भी कहा कि बिना वैध अनुमति के प्रदर्शन बुलाकर लोगों की आजीविका को प्रभावित करना गलत है।

व्यापारियों का तर्क, 2 हजार करोड़ रुपये का नुकसान
व्यापारियों की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि रैलियों और धरनों के कारण दिल्ली के बाजारों को लगभग 2 हजार करोड़ रुपये का भारी नुकसान उठाना पड़ा है। उन्होंने कहा कि कनॉट प्लेस (CP) जैसे प्रमुख व्यापारिक केंद्रों में दुकानें बंद होने की कगार पर हैं और त्योहारी सीजन में बिक्री न होने से व्यापार पूरी तरह ठप हो जाएगा। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि अब रामलीला मैदान या जंतर-मंतर जैसे पुराने विकल्पों से हटकर किसी नए और बेहतर स्थान का समाधान खोजा जाना चाहिए, ताकि आम नागरिकों, मरीजों और कारोबारियों को राहत मिल सके।
अदालत में प्रदर्शनों के दौरान फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी (FRT) के इस्तेमाल को लेकर भी बहस देखने को मिली। एडवोकेट प्रशांत भूषण ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों पर फेशियल रिकग्निशन के जरिए अवैध निगरानी की जा रही है और सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि इस डेटा का इस्तेमाल कहां और कौन कर रहा है। इसके जवाब में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सार्वजनिक स्थलों पर प्रदर्शन करते समय कोई व्यक्ति निजता के अधिकार का दावा नहीं कर सकता, और सीसीटीवी निगरानी कोर्ट के पिछले निर्देशों के अनुरूप ही की जा रही है।
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