भाजपा की पदयात्रा पर कांग्रेस का हमला, शिवराज के गरीबी वाले दावे को बताया भ्रामक
UP Congress: कांग्रेस ने भाजपा की ‘प्रजातंत्र बचाओ’ पदयात्रा को लेकर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और उत्तर प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग के प्रभारी अभय दुबे ने आरोप लगाया कि यह यात्रा लोकतंत्र बचाने के लिए नहीं, बल्कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए निकाली जा रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा की यह कवायद प्रजातंत्र बचाने के बजाय भाजपा से प्रजातंत्र बचाने की कोशिश है।
मंगलवार को प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में अभय दुबे ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयानों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री प्रदेश में एक करोड़ 27 लाख मतदाताओं के नाम काटे जाने को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर भाजपा लोकतंत्र बचाने के नाम पर पदयात्रा निकाल रही है। दुबे ने इसे भाजपा के भीतर विरोधाभास बताया।
‘जनादेश के बजाय ज्ञानादेश की राजनीति कर रही भाजपा’
अभय दुबे ने कहा कि भाजपा का पदयात्रा अभियान अपने ही मुख्यमंत्री के सवालों के विपरीत दिखाई देता है। उनके मुताबिक, भाजपा जनादेश के बजाय ‘ज्ञानादेश’ की राजनीति कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार के समर्थन में निकाली जा रही पदयात्रा लोकतंत्र और संविधान से जुड़े सवालों से ध्यान हटाने का प्रयास है।
कांग्रेस प्रवक्ता ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने सबसे पहले लोकसभा में इस प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया था।
दुबे के मुताबिक, बिहार में वर्ष 2003 की मतदाता सूची को आधार बनाकर नागरिकता से जुड़े सवाल खड़े किए गए। अब उत्तर प्रदेश में भी इसी तरह की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
चुनाव आयोग के फैसलों पर भी उठाए सवाल
अभय दुबे ने दावा किया कि फार्म-6 में बदलाव और ईसीआईनेट से जुड़े कुछ फैसलों पर सभी चुनाव आयुक्तों की सहमति नहीं ली गई। उन्होंने 26 अक्टूबर 2026 को चुनाव आयोग की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे का हवाला दिया।
दुबे के अनुसार, इस हलफनामे में एसआईआर से जुड़े तीन आदेशों को सर्वसम्मति से लिया गया फैसला बताया गया है। हालांकि, अन्य फैसलों के बारे में ऐसी बात नहीं कही गई है। उन्होंने चुनाव आयोग के कामकाज पर सवाल उठाते हुए इस मामले में स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
शिवराज के गरीबी संबंधी दावे पर भी पलटवार
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के उस बयान पर भी अभय दुबे ने आपत्ति जताई, जिसमें उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के 49 प्रतिशत परिवार गरीबी रेखा से ऊपर आए हैं।
दुबे ने आरोप लगाया कि शिवराज सिंह चौहान ने विश्व बैंक की रिपोर्ट का पूरा अध्ययन किए बिना यह दावा किया है। उन्होंने कहा कि इसी रिपोर्ट में 57 प्रतिशत आबादी के भीषण गरीबी में जीवनयापन करने का उल्लेख भी है।
कांग्रेस प्रवक्ता ने शिवराज सिंह चौहान पर निशाना साधते हुए मंदसौर के किसान गोलीकांड और व्यापम घोटाले का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक व्यवस्था से जुड़े सवालों का जवाब देने के बजाय राजनीतिक अभियान चला रही है।
पढ़ाई का खर्च जुटाने के लिए खून बेचने को मजबूर गरीब छात्र: राजेंद्र पाल गौतम
प्रयागराज में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों की मुश्किलों को लेकर कांग्रेस ने गंभीर चिंता जताई है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अनुसूचित जाति विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष और यूपी कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने आरोप लगाया कि गरीब विद्यार्थियों को पढ़ाई और रोजमर्रा का खर्च जुटाने के लिए खून बेचने जैसी जोखिमपूर्ण स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।
इस मामले में राजेंद्र पाल गौतम ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष इन्द्रजीत सिंह को ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने प्रयागराज में छात्रों के कथित शोषण की उच्चस्तरीय जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

कोचिंग, हॉस्टल और खाने का खर्च बना परेशानी
राजेंद्र पाल गौतम ने 2 5 से 27 अक्टूबर के बीच प्रकाशित एक समाचारपत्र की खोजी रिपोर्ट का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि प्रयागराज में नीट, एसएससी और दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे गरीब छात्र कोचिंग फीस, हॉस्टल और भोजन का खर्च उठाने के लिए रक्त बेचने को मजबूर हो रहे हैं।
ज्ञापन के मुताबिक, कोचिंग संस्थानों की सालाना फीस करीब 1.20 लाख से 1.80 लाख रुपये तक है। इसके अलावा रहने और खाने का खर्च भी विद्यार्थियों पर भारी पड़ता है।
रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि ब्लड बैंकों के आसपास सक्रिय एजेंट छात्रों से रक्त लेते हैं और मरीजों के परिजनों से प्रति यूनिट करीब 8 हजार रुपये तक वसूलते हैं। इसके बदले विद्यार्थियों को केवल 3,500 से 4,000 रुपये दिए जाते हैं। कुछ छात्रों के महीने में दो से चार बार रक्तदान करने की बात भी सामने आई है।
मुख्य सचिव को निर्देश देने और छात्रों की मदद की मांग
राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि पढ़ाई और पेट पालने के लिए छात्रों को अपने स्वास्थ्य से समझौता करना पड़ रहा है। यह शिक्षा में आर्थिक असमानता और गरीब विद्यार्थियों के लिए पर्याप्त सरकारी सहायता नहीं होने की स्थिति को उजागर करता है।
उन्होंने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से प्रदेश के मुख्य सचिव को निर्देश देने की मांग की है, ताकि प्रयागराज समेत प्रमुख कोचिंग केंद्रों में जांच कराई जा सके। साथ ही कथित अवैध रक्त कारोबार में शामिल एजेंटों और संबंधित ब्लड बैंकों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
गौतम ने प्रभावित विद्यार्थियों को आर्थिक सहायता देने की भी अपील की। इसके अलावा गरीब छात्रों के लिए छात्रवृत्ति, सरकारी कोचिंग और कम खर्च वाले छात्रावासों की व्यवस्था बढ़ाने की मांग की है।
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