चार साल बाद यूपी को मिला स्थायी पुलिस प्रमुख, राजीव कृष्ण को मिली कमान
Lucknow News: उत्तर प्रदेश में लंबे अरसे से चली आ रही स्थायी पुलिस प्रमुख की कमी आखिरकार पूरी हो गई है। प्रदेश सरकार ने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी और वर्तमान कार्यवाहक डीजीपी राजीव कृष्ण को पूर्णकालिक पुलिस महानिदेशक (DGP) नियुक्त किया है। यह फैसला संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा भेजे गए पैनल में तीन नामों में से एक को चुनकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी मंजूरी देने के बाद लिया गया।
कौन हैं राजीव कृष्ण
गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) के रहने वाले राजीव कृष्ण का जन्म 26 जून 1969 को हुआ था और वे 1991 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। उनकी शिक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में है। लगभग तीन दशक से अधिक के अपने करियर में उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है– पुलिस उपमहानिरीक्षक (DIG), महानिरीक्षक (IG), अपर पुलिस महानिदेशक (ADG) और फिर 1 फरवरी, 2024 को पुलिस महानिदेशक (DGP) के पद पर पदोन्नत हुए। वर्तमान में वे DGP मुख्यालय और सतर्कता विभाग लखनऊ का कार्यभार संभाल रहे थे।
राजीव कृष्ण अपने शानदार सेवाकाल के लिए कई पुरस्कार प्राप्त कर चुके हैं। उन्हें पुलिस मेडल, मेधावी सेवा के लिए पुलिस मेडल, राष्ट्रपति पुलिस पदक और डीजीपी के कमेंडेशन रोल के साथ-साथ सिल्वर, गोल्ड और प्लैटिनम कमेंडेशन डिस्क से भी सम्मानित किया जा चुका है।

2029 तक मिलेगा स्थिर कार्यकाल
गौरतलब है कि मई 2022 के बाद से उत्तर प्रदेश में कोई स्थायी डीजीपी नहीं था। राजीव कृष्ण 1 जून 2025 से कार्यवाहक डीजीपी चल रहे थे। अब जून 2029 में उनकी सेवानिवृत्ति तक उन्हें नियमानुसार कम से कम दो साल का स्थायी कार्यकाल मिलने की संभावना है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के अनुसार राज्य के डीजीपी का कार्यकाल दो साल का अनिवार्य होता है।
रेस में किसे छोड़ा पीछे
इस रेस में 1990 बैच की रेणुका मिश्रा, 1991 बैच के आलोक शर्मा (वर्तमान में SPG डायरेक्टर) और पीयूष आनंद जैसे वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल थे, लेकिन UPSC के पैनल और सरकार ने राजीव कृष्ण के नाम पर मुहर लगा दी। 26 मई, 2025 को UPSC, मुख्य सचिव और अपर मुख्य सचिव (गृह) की बैठक में सीनियरिटी और सर्विस रिकॉर्ड के आधार पर तीन नामों का पैनल बनाया गया, जिसके बाद राज्य सरकार ने अंतिम मंजूरी दी।
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